Semen Sorted Bank Bassi: जयपुर के बस्सी में राजस्थान का पहला सेक्स सॉर्टेड सीमन बैंक शुरू हुआ। इससे बछड़ियों के जन्म की संभावना 90% तक बढ़ेगी, अच्छी नस्ल, अधिक दूध उत्पादन और आवारा पशुओं पर नियंत्रण मिलेगा, डेयरी बिजनेस वालों की आय भी लाखों में होगी 

Jaipur Dairy Milestone : राजस्थान को डेयरी उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाला एक ऐतिहासिक कदम सोमवार को उठाया गया। जयपुर जिले के बस्सी में राज्य का पहला सेक्स सॉर्टेड सीमन बैंक शुरू किया गया, जो अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इस तकनीक से 90 प्रतिशत तक बछड़ियों के जन्म की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे अच्छी नस्ल की गायें बढ़ेंगी और दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, नर पशुओं की संख्या में नियंत्रण से आवारा पशुओं की समस्या पर भी काबू पाया जा सकेगा।

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गुजरात की आनंद डेयरी के साथ साइन हुआ MoU

आरसीडीएफ (RCDF) कार्यालय सभागार में दोपहर 3 बजे आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, आनंद (गुजरात) के साथ MoU पर हस्ताक्षर हुए। इसी दौरान जयपुर डेयरी और एनडीडीबी (NDDB) के बीच बायो-गैस प्लांट के लिए भी समझौता हुआ। इसके अलावा, बांसवाड़ा में 50,000 लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता वाले डेयरी प्लांट के लिए 8 करोड़ रुपये के ऋण को भी मंजूरी दी गई और एनडीडीबी द्वारा ऋण स्वीकृति पत्र सौंपा गया।

कार्यक्रम में पशुपालन एवं गोपालन मंत्री जोराजराम कुमावत, राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेनिवाल, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष मिनेश शाह, शासन सचिव समीर शर्मा और आरसीडीएफ की प्रबंध निदेशक श्रुति भारद्वाज सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

अमेरिका से आईं हाईटेक मशीनें 

बस्सी के इस फ्रोजन सीमन बैंक में मॉर्डन लैब और अमेरिका से मंगाई गई दो हाईटेक मशीनें लगाई गई हैं। वर्तमान में 123 सांडों से तैयार पारंपरिक सीमन डोज को नई तकनीक की मशीनों से प्रोसेस कर ‘सेक्स सॉर्टेड सीमन डोज’ तैयार किए जाएंगे। यह तकनीक पहले गुजरात के आनंद में लागू की गई थी और अब राजस्थान देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहां यह सुविधा शुरू हुई है।

डेयरी उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पऱ़

पशुपालन मंत्री जोराजराम कुमावत ने लैब का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह परियोजना राजस्थान की डेयरी इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित होगी। मात्र 5-6 महीनों में यह प्लांट तैयार हुआ है। वर्तमान में राजस्थान दूध उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है और इस परियोजना से राज्य की उत्पादकता में और इजाफा होगा।

हर घर तिरंगा, हर घर सरस 

 कार्यक्रम के दौरान ‘हर घर तिरंगा’ और ‘हर घर सरस बाइक रैली’ का भी आयोजन किया गया, जिससे डेयरी और ग्रामीण विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। यह पहल न केवल पशुपालन को आधुनिक बनाने की दिशा में है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, पशुधन की गुणवत्ता सुधारने और आवारा पशु समस्या के समाधान की ओर भी एक महत्वपूर्ण कदम है।