BlaBlaCar fraud : इटावा में दो फर्जी अफसरों ने स्कॉर्पियो पर 'भारत सरकार' और 'मजिस्ट्रेट' लिखवाकर यात्रियों से लूटपाट की। ब्ला-ब्ला एप से बुकिंग कर चलती गाड़ी में तमंचे से डराकर की वारदात, पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया।

Fake government officer caught: इटावा जिले के सैफई क्षेत्र में पुलिस ने दो ऐसे युवकों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी अफसर बनकर ब्ला-ब्ला ऐप के ज़रिए लोगों को सफर कराते और फिर रास्ते में लूट लेते थे। ये युवक कोई मामूली ठग नहीं, बल्कि पूरी योजना के साथ चल रहे थे, स्कॉर्पियो गाड़ी पर 'भारत सरकार' और 'मजिस्ट्रेट' के स्टीकर, नकली पहचान पत्र और हथियार के साथ।

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कहां से शुरू हुई ये कहानी?

इस घटना की शुरुआत लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से हुई। एक आम यात्री ने स्कॉर्पियो पर सरकारी प्लेट देखकर भरोसा कर लिया और ब्ला-ब्ला ऐप से फिरोजाबाद तक की यात्रा बुक की। जैसे ही गाड़ी इटावा जिले के सैफई थाना क्षेत्र में पहुंची, सवारी के लिए यह सफर डरावना सपना बन गया। नकली अफसरों ने तमंचा दिखाकर उसका मोबाइल और नकदी छीनी और फिर चलती गाड़ी से बाहर फेंक दिया।

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पुलिस की सतर्कता से बची एक और वारदात

गनीमत रही कि हाईवे पर गश्त कर रही पुलिस टीम मौके के पास ही थी। घायल यात्री ने हिम्मत जुटाकर पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने तुरंत स्कॉर्पियो का पीछा किया, मगर आरोपी गाड़ी छोड़कर फरार हो गए। कुछ घंटों बाद वही गाड़ी वापस लेने पहुंचा एक युवक जो खुद को SDM बता रहा था।

कैसे हुआ नकली SDM का पर्दाफाश?

पुलिस चौकी पहुंचा युवक अमर पांडे ने खुद को शामली जिले के ऊन तहसील का उपजिलाधिकारी बताया और एक नियुक्ति पत्र भी दिखाया। शुरुआत में सब कुछ असली सा लग रहा था, लेकिन पुलिस की चौकसी रंग लाई। पीड़ित यात्री को बुलाकर पहचान करवाई गई, जिसने दोनों आरोपियों को तुरंत पहचान लिया।

बरामद हुए हथियार, कारतूस और फर्जी दस्तावेज

पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाशी ली तो उसमें दो तमंचे, कारतूस और फर्जी दस्तावेज मिले। कार पर लगी 'मजिस्ट्रेट' प्लेट भी जाली निकली। जांच में पता चला कि आरोपी बलरामपुर जिले के रहने वाले हैं और अलग-अलग जिलों में फर्जी नाम से घूमते रहे।

SSP ने दी जनता को चेतावनी

इटावा के एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने मामले का खुलासा करते हुए कहा कि ये गिरोह योजनाबद्ध तरीके से ट्रैवल ऐप्स का दुरुपयोग कर रहा था। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गाड़ी को देखकर सतर्क रहें और तुरंत पुलिस को सूचना दें।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह गिरोह और भी वारदातों में शामिल रहा है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन लोगों ने फर्जी नियुक्ति पत्र कहां से और कैसे बनवाए। फिलहाल दोनों आरोपी सलाखों के पीछे हैं और पुलिस की पूछताछ जारी है।

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