काशी तमिल संगमम 4.0 के तहत तमिलनाडु से किसानों का चौथा दल वाराणसी पहुंचा। बनारस स्टेशन पर ढोल-नगाड़ों से उनका भव्य स्वागत हुआ। यह आयोजन उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है।

वाराणसी: काशी तमिल संगमम 4.0 में शामिल होने लिए तमिलनायडु से चौथा दल वाराणसी पहुंचा। इस दल में तमिलनाडु के किसान शामिल है। जिनका स्वागत काशी के महापौर अशोक कुमार तिवारी एवं भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने किया। कार्यक्रम में पूरे स्टेशन परिसर में उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक समरसता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। दरअसल, तमिल करकलाम के तहत 2 से 15 दिसंबर तक वाराणसी में आयोजित है।

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ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और हर हर महादेव के जयकारे

अतिथियों का स्वागत ढोल-नगाड़ों, शंखनाद, पुष्पवर्षा, तिलक-माला से किया गया। ‘हर हर महादेव’ और ‘तमिल-काशी एकता अमर रहे’ भारत माता की जय ,वंदे मातरम, वडक्कम काशी , जयघोष से पूरा स्टेशन परिसर गूंज उठा।

क्या है काशी तमिल संगमम

महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत - श्रेष्ठ भारत’ संकल्प को काशी तमिल संगमम साकार कर रहा है, और यह आयोजन दोनों संस्कृतियों को दिल से जोड़ने का कार्य कर रहा है। काशी तमिल संगमम भारत की सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है, जो उत्तर और दक्षिण भारत को आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है।काशी अतिथियों के स्वागत में सदैव अग्रणी रही है, और यह आयोजन वैश्विक सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा देता है।

परंपरा और राष्ट्रबोध का महासंगम

यह कार्यक्रम केवल पर्यटन नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रबोध का महासंगम है। इस बार का थीम तमिल करकलाम (तमिल सीखो) है। अतिथियों ने काशी में हुए भव्य स्वागत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यहां उन्हें अपने घर जैसा आत्मीय अनुभव प्राप्त हुआ है। आगामी दिनों में यह प्रतिनिधिमंडल काशी के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करेगा। (खबर इनपुट - सुरेन्द्र गुप्ता, वाराणसी)