प्रो. केवी राजू को केंद्र सरकार ने नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। प्रधानमंत्री मोदी की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया। वे पहले यूपी के आर्थिक सलाहकार रहे हैं और अब राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आर्थिक सलाहकार प्रोफेसर केवी राजू को केंद्र सरकार ने एक अहम जिम्मेदारी दी है। उन्हें नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी के बाद की गई है। प्रो. केवी राजू सहित अन्य विशेषज्ञों को भी कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।

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अशोक लाहिड़ी बने उपाध्यक्ष, कई विशेषज्ञों को मिला स्थान

सरकार ने अशोक कुमार लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही राजीव गौबा, प्रो. केवी राजू, प्रो. गोबर्धन दास, प्रो. अभय करंदीकर और डॉ. एम. श्रीनिवास को पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया है। यह टीम नीति निर्माण और देश की आर्थिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

यूपी सरकार में लंबे समय से निभा रहे थे अहम भूमिका

प्रो. केवी राजू पिछले करीब नौ वर्षों से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे थे। इससे पहले वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार भी रह चुके हैं। उनके अनुभव का लाभ अब राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगा।

शिक्षा और शोध क्षेत्र में मजबूत अनुभव

प्रो. राजू का अकादमिक और रिसर्च क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने हैदराबाद स्थित आईसीआरआईएसएटी में प्रिंसिपल साइंटिस्ट के रूप में काम किया है। इसके अलावा कोलंबो के आईडब्ल्यूएमआई में सोशल साइंटिस्ट और वाशिंगटन डीसी के आईएफपीआरआई में विजिटिंग रिसर्च फेलो भी रह चुके हैं। उन्होंने बेंगलुरु के आईएसईसी में प्रोफेसर के रूप में भी सेवाएं दी हैं।

करियर की शुरुआत और उपलब्धियां

प्रो. केवी राजू ने अपने करियर की शुरुआत गुजरात के आईआरएमए आनंद से की थी। उन्होंने अब तक 26 किताबें लिखी हैं और 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। आर्थिक नीति और शोध के क्षेत्र में उनका योगदान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

नियुक्ति से नीति निर्माण को मिलेगा नया अनुभव

प्रो. केवी राजू की नियुक्ति उनके लंबे अनुभव और आर्थिक नीतियों में उनके योगदान को दर्शाती है। उनकी विशेषज्ञता से नीति आयोग को मजबूती मिलेगी और देश की आर्थिक योजनाओं को बेहतर दिशा मिल सकेगी।