योगी सरकार ने ओबीसी छात्रों के सशक्तीकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति देने का लक्ष्य रखा गया है। डीबीटी के जरिए करोड़ों छात्रों तक सीधी मदद पहुंच रही है।

"जब शिक्षा का दीप हर घर में जलता है, तब समाज समानता की राह पर बढ़ता है।" यही सोच लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ओबीसी छात्रों के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाए हैं। बीते आठ वर्षों में योगी सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के उत्थान के लिए कई अभूतपूर्व निर्णय लिए हैं और अब प्रदेश एक नई शैक्षिक क्रांति की ओर अग्रसर है।

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अभूतपूर्व स्कॉलरशिप वितरण से बनी मिसाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुक्रवार को 10,28,205 से अधिक छात्र-छात्राओं को 300 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई। इनमें से 4,83,000 से अधिक ओबीसी छात्रों को 126.69 करोड़ रुपये की राशि दी गई। सरकार ने वर्ष 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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2016-17 तक केवल 46 लाख छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति मिलती थी, लेकिन योगी सरकार ने यह संख्या बढ़ाकर 62 लाख तक पहुंचा दी। तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था के जरिए इस बार अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के 3,56,000 छात्रों को 114.92 करोड़, सामान्य वर्ग के 97,000 से अधिक छात्रों को 29.18 करोड़ और अल्पसंख्यक वर्ग के 90,758 छात्रों को 27.16 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप सीधे बैंक खातों में स्थानांतरित की गई।

ग्रामीण और वंचित युवाओं को मिला अवसर

योगी सरकार का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले ओबीसी युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ना है। वर्ष 2024-25 में 32,22,499 ओबीसी छात्रों को स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति दी गई। 2017 से अब तक 2,07,53,457 ओबीसी छात्रों को कुल 13,535.33 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है, जो पिछली सरकारों के 4,197 करोड़ रुपये के व्यय से चार गुना अधिक है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार ने शिक्षा को केवल नीति नहीं, बल्कि मिशन बनाया है।

‘विकसित उत्तर प्रदेश’ का मूलमंत्र: ओबीसी सशक्तीकरण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षा ही सामाजिक समानता की जड़ है और ओबीसी समुदाय का सशक्तीकरण ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ का आधार है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी छात्र, चाहे वह ग्रामीण हो या वंचित, शिक्षा से वंचित न रहे। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने डीबीटी प्रणाली के माध्यम से इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की है जिससे छात्रवृत्ति सीधे छात्रों के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे सरकार की जवाबदेही और छात्रों का भरोसा दोनों मजबूत हुए हैं।

‘विकसित यूपी’ की राह पर नया मॉडल

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पिछड़ा वर्ग कल्याण व दिव्यांगजन सशक्तीकरण, नरेंद्र कश्यप ने कहा, “योगी सरकार ने ओबीसी और दिव्यांगजनों के लिए खजाना खोल दिया है। हमारा उद्देश्य है कि पिछड़े समाज को शिक्षा से सशक्त बनाकर सामाजिक समानता की नींव रखी जाए। यही प्रयास ‘विकसित यूपी’ की दिशा तय करेगा।” शिक्षा से लेकर आत्मनिर्भरता तक, योगी सरकार की यह नीति अब न केवल आंकड़ों में, बल्कि समाज की सोच में भी बदलाव ला रही है।

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