पीएम मोदी ने लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन कर मुखर्जी, दीनदयाल और वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। अटल जयंती पर सुशासन की अहमियत बताते हुए कहा कि विकास का असली पैमाना अंतिम व्यक्ति की मुस्कान है।

लखनऊ/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार 25 दिसंबर को लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फीट ऊचीं प्रतिमाओं का अनावरण करके पुष्पांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने कहा, आज अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर सुशासन के उत्सव को भी याद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय तक केवल 'गरीबी हटाओ' जैसे नारों को शासन माना गया, लेकिन अटल जी ने सुशासन को जमीन पर उतारकर दिखाया।

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जम्मू-कश्मीर में आज पूरी तरह भारत का कानून लागू

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश को निर्णायक दिशा देने का काम किया। डॉ. मुखर्जी ने 'दो विधान, दो निशान और दो प्रधान' को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन इसे आजादी के बाद भी जम्मू-कश्मीर में लागू रखा गया। यह भारत की एकता और अखंडता के लिए एक बड़ी चुनौती था। पीएम मोदी ने आगे कहा, हमारी सरकार को आर्टिकल 370 हटाने का मौका मिला और आज भारत का संविधान जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह लागू है।

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लखनऊ में बन रही ब्रह्मोस मिसाइल

पीएम मोदी ने कहा, आज देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने जिस ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत देखी, उसे लखनऊ में बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता का प्रतीक बताया।

अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के चेहरे की मुस्कान ही विकास का पैमाना

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत की प्रगति का असली पैमाना विकास के आंकड़े नहीं बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के चेहरे की मुस्कान है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद दर्शन की बात करते हुए कहा कि विकास में शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा - सबका संतुलन जरूरी है।

..तो पंडित दीनदयाल जी के विजन के साथ वास्तविक न्याय

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा पिछले एक दशक में करोड़ों भारतीय गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। यह इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि सरकार ने उन लोगों को प्राथमिकता दी, जो सालों तक पीछे छूटे रहे और समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े थे। 2014 से पहले करीब 25 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में थे, जबकि आज लगभग 95 करोड़ भारतीय इस सुरक्षा कवच के दायरे में आते हैं। आज देश के करोड़ों नागरिकों को पहली बार पक्का घर, शौचालय, नल से जल, बिजली और गैस कनेक्शन मिल रहे हैं। जब अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं, इलाज और सुरक्षा पहुंचती हैं, तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विजन के साथ वास्तविक न्याय होता है।