Prayagraj Tragic Love: प्रयागराज के घूरपुर क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। पत्नी की मौत के बाद जब पति ने उसकी लाश देखी तो सदमे में वहीं खड़े-खड़े उसकी भी मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने चार बच्चों को अनाथ कर दिया। 

Prayagraj shocking double death: प्रयागराज के घूरपुर इलाके में बुधवार की सुबह एक ऐसा मंजर लेकर आई जिसने गांव ही नहीं, पूरे जिले को स्तब्ध कर दिया। 32 वर्षीय अशोक कुमार वर्मा की पत्नी की तबीयत कई दिनों से खराब चल रही थी। परिजनों ने हर संभव इलाज करवाया, लेकिन बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांसें ले लीं। पत्नी की मौत की खबर मिलते ही अशोक कुमार वर्मा को जैसे बिजली का झटका लगा। जब उन्होंने पत्नी का शव देखा तो वह बुरी तरह कांपने लगे और कुछ ही पलों में वहीं खड़े-खड़े उनका भी निधन हो गया। गांव के लोगों और परिजनों की आंखों में आंसू और दिलों में सदमे की लहर दौड़ गई।

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सच्चा प्रेम…या कुदरत का कहर? 

गांव वाले और रिश्तेदार इस घटना को अब तक समझ नहीं पा रहे हैं। कुछ इसे अशोक का अपनी पत्नी से बेपनाह प्रेम मानते हैं, तो कुछ का कहना है कि यह सदमे से हुई हार्ट फेल्योर की स्थिति हो सकती है। लेकिन एक बात तय है-यह सिर्फ मौत नहीं थी, यह एक प्रेम कहानी का अंत था जो अचानक और दिल दहला देने वाले तरीके से खत्म हो गई।

दिल्ली में नौकरी करता था अशोक, पत्नी का कराने आया था इलाज

प्रयागराज के घूरपुर थानांतर्गत बगबना निवासी अशोक कुमार वर्मा दिल्ली में नौकरी करता था। उसके चार बच्चे हैं। पत्नी लक्ष्मी देवी (32) देवी बच्चों को लेकर बगबना में रहती थी। इधर कुछ दिनों से लक्ष्मी बीमार चल रही थी। हालत ज्यादा क्रिटिकल होने पर अशोक ने उसे लखनऊ में ले जाकर भर्ती कराया था। सोमवार को लखनऊ में लक्ष्मी को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 

रास्ते में अचानक मृत पत्नी को आ गया था होश

वहां से अशोक घरवालों के साथ लक्ष्मी की लाश लेकर सोमवार रात में प्रयागराज आ रहा था। रास्ते में अचानक लक्ष्मी की सांसे चलने लगी और उसे होश आ गया। जिसके बाद अशोक उसे प्रयागराज के एक अस्पताल में लाकर भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान बुधवार सुबह अचानक लक्ष्मी देवी की फिर मौत हो गई। डाक्टरों जब यह बात अशोक को बताई तो वह कुछ सेंकेंड के लिए चुपचाप खड़ा रहा और खड़े-खड़े ही वहीं गिरा, फिर उठा नहीं। डाक्टरों ने चेक किया तो पाया कि अशोक की भी सांसे थम चुकी हैं।

चार मासूम…अब हो गए बेसहारा 

इस दर्दनाक हादसे में सबसे ज्यादा पीड़ा उन चार बच्चों को हुई, जिन्होंने एक ही दिन में अपनी मां और पिता-दोनों को खो दिया। अब सवाल ये है कि इन मासूमों का भविष्य कौन संवार पाएगा? प्रशासन, समाज और रिश्तेदारों पर अब बड़ी जिम्मेदारी है।

क्या यह दिल का दौरा था या भावनाओं की पराकाष्ठा?

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इन चारों बच्चों के लिए सरकारी सहायता और संरक्षण की मांग की है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अशोक की मौत का असली कारण क्या था। लेकिन लोगों का मानना है कि यह एक ऐसा मामला है जो न सिर्फ भावुक करता है, बल्कि समाज और प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर करता है कि ऐसी घटनाओं में हम क्या कर सकते हैं?