राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी चल रही है। राम लला के मंदिर, उनकी मूर्ति और पूजा की परंपरा में सुनिए क्या कहते हैं मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास…

अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। भगवान राम के भव्य मंदिर के उद्घाटन की तारीख भी 22 जनवरी को तय की गई है। राम मंदिर के निर्माण को लेकर रोजाना खबरें आ रही हैं। इस बीच राममंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी कुछ पुरानी यादों के बारे में बातचीत की। 

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आचार्य ने कहा कि सालों पुराना सपना जैसे सच हो रहा है। इस पल का न जाने कितने सालों से हम सब को इंतजार था। अब वह घड़ी आने को है। भगवान राम अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो सकेंगे। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का दृश्य अपने आप में अद्भुत होगा। जिस पल रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजेंगे वह पल एक नए युग के समान होगा। वह समय याद करता हूं तो बहुत कष्ट होता था जब बरसात होने पर बारिश के छींटे भगवान के आसन तक आ जाते थे। 

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साल में एक बार प्रभु के वस्त्र बदले जाते थे 

अयोध्या में रहकर भी प्रभु राम का वास बहुत कष्टकारी थी। रामनवमी को रामलला को जो वस्त्र बनते थे, वही वर्षभर चलते थे। जबकि उन्हें रोज नए वस्त्र पहनाए जाने चाहिए। उनके भोग, प्रसाद और अन्य खर्चों के लिए सरकार की ओर से केवल 20 हजार रुपए सालाना मिलते थे। कई बार और धन की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

रामानंदी परंपरा से पूजन
राम लला की प्रतिमा पर आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि रामलला की मूर्ति बालक रूप वाली होगी। यह रूप अपने आप में विलक्षण होता है। राम लला के बाल रूप को देखने के लिए तो स्वयं भगवान शंकर आए थे। आचार्य ने कहा कि बालक रूप में प्रभु राम का दर्शन अद्भुत होता है। उन्होंने कहा पूज पद्धति को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट पुजारियों की नियुक्ति कर रहा है, लेकिन इतना तय है कि राम लला के सभी मंदिरों में पूजा रामानंदी परंपरा के अनुसार ही होगी। इस पद्धति में 16 मंत्र होते हैं और वैष्णव परंपरा में इन्हीं मंत्रों से पूजा होती रही है।