सहारनपुर के आलमपुर खुर्द गांव के किसान अश्वनी कुमार सैनी ने गुलदावरी की खेती से शानदार मुनाफा कमाया है। परंपरागत खेती छोड़कर फूलों की खेती अपनाने से उन्हें हर साल लाखों की कमाई हो रही है।

सहारनपुर के किसान अब नई तकनीकों और नये तरीकों से खेती करने में आगे बढ़ रहे हैं। जिले के बेहट विधानसभा क्षेत्र के आलमपुर खुर्द गांव के किसान अश्वनी कुमार सैनी ने परंपरागत खेती से बाहर निकलकर फूलों की खेती की ओर रुख किया है। पिछले 8-10 सालों से वे गेहूं और गन्ना जैसी पारंपरिक फसलों के बजाय अब गुलदावरी फूलों की खेती कर रहे हैं, और इससे उन्हें शानदार मुनाफा हो रहा है।

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परंपरागत खेती से हटकर फूलों की खेती में सफलता

एक निजी चैनल से बातचीत के दौरन, अश्वनी कुमार ने बताया कि पहले वे परंपरागत खेती करते थे, लेकिन इसमें उनका मन नहीं लगा और उन्होंने एग्रीकल्चर से एमएससी की। इसके बाद उन्होंने खेती का तरीका बदलते हुए फूलों की खेती शुरू की। उनका कहना है कि फूलों की खेती परंपरागत खेती की तुलना में बहुत लाभकारी है, क्योंकि इसमें खर्च कम और मुनाफा कई गुना ज्यादा होता है।

इस बार उन्होंने गुलदावरी फूल की खेती शुरू की है। गुलदावरी के पेड़ की कीमत ₹2 होती है, और एक पेड़ से 10 से ₹15 तक का मुनाफा मिलता है। उन्होंने इन फूलों के पौधे कोलकाता से मंगवाए हैं और इन्हें अपने 3 बीघा खेत में लगाया है।

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गुलदावरी फूल की खेती से मिलने वाला मुनाफा

फरवरी में गुलदावरी फूल की खेती शुरू हो जाएगी और खासकर शादी के सीजन में यह अच्छा मुनाफा देगी। एक फूल की कीमत ₹2 है, जबकि एक पेड़ पर 8-10 फूल आते हैं, जिससे एक पेड़ आसानी से ₹10-₹15 का मुनाफा दे देता है। इस फूल का इस्तेमाल शादी, जन्मदिन, और सजावट के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिससे इसका बाजार भी काफी बढ़ जाता है।

फूलों की खेती से हो रहा सालाना करोड़ों का मुनाफा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अश्वनी हर साल अपने एक एकड़ खेत में नए फूलों की खेती शुरू करते हैं और अभी तक वे 10 एकड़ में विभिन्न प्रकार के फूलों की खेती कर रहे हैं। उनकी फूलों की खेती दिल्ली के गाजीपुर मंडी में बिकती है और हर साल वे लाखों रुपये कमा रहे हैं।

10 एकड़ में फूलों की खेती से बेहतरीन मुनाफा

अश्वनी ने गन्ने और अन्य परंपरागत फसलों से फूलों की खेती में 10 गुना अधिक मुनाफा कमाया है। उनका मानना है कि फूलों की खेती से न केवल अच्छा मुनाफा होता है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। उनका अगला लक्ष्य अपने खेत में और अधिक फूलों की किस्मों को शामिल करना है।

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