मायावती ने चल दिया अगर यह दांव तो अखिलेश यादव को लगेगा बड़ा झटका!
यूपी की राजनीति में 2026 की शुरुआत के साथ बड़ा उलटफेर संभव है। मकर संक्रांति के बाद योगी मंत्रिमंडल विस्तार, बीजेपी की नई ओबीसी रणनीति, अखिलेश यादव का पीडीए प्लस दांव और मायावती-कांग्रेस के कथित सीक्रेट ऑफर से 2027 की सियासी तस्वीर बदल सकती है।

मायावती का फैसला बदल सकता है सियासी खेल, अखिलेश को लग सकता है बड़ा झटका
नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सियासी गलियारों में ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले महीनों में गठबंधन, रणनीति और सत्ता संतुलन की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। मकर संक्रांति के बाद योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर अखिलेश यादव की ‘पीडीए प्लस’ रणनीति और मायावती-कांग्रेस के कथित सीक्रेट ऑफर तक, यूपी की राजनीति एक नए मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है।
मकर संक्रांति के बाद योगी मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल संभव
साल की शुरुआत के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने 2027 की तैयारी का खाका खींचना शुरू कर दिया है। खरमास समाप्त होते ही, यानी मकर संक्रांति के बाद योगी सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ पुराने मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है, जबकि नए और जातिगत संतुलन साधने वाले चेहरों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस कानून व्यवस्था और हार्डकोर हिंदुत्व पर बना रहेगा, वहीं नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के जरिए बीजेपी की ओबीसी प्लस रणनीति को जमीन पर उतारने की तैयारी है। हाल ही में पुलिस अधिकारियों के साथ हुए दो दिवसीय मंथन से यह संकेत भी साफ है कि 2027 के चुनाव में कानून व्यवस्था को सरकार सबसे बड़ा मुद्दा बनाएगी।
अखिलेश यादव का ‘पीडीए प्लस’ दांव
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी 2026 में अपनी रणनीति को नया रूप देने जा रहे हैं। अब तक पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) के सहारे राजनीति करने वाली सपा, अब इसमें सवर्णों को जोड़ने की कोशिश में है। बीजेपी के भीतर ब्राह्मणों की कथित नाराजगी को भांपते हुए अखिलेश यादव ने ‘पीडीए प्लस’ की लाइन पकड़ी है। अयोध्या से लेकर बलिया तक ब्राह्मण चेहरों को आगे लाया जा रहा है। माना जा रहा है कि बिहार के बदलते सियासी समीकरणों का असर यूपी पर भी दिख सकता है। हालांकि, राज्यसभा सीटों और पंचायत चुनावों को लेकर सपा और कांग्रेस के रिश्तों में खटास के संकेत भी मिलने लगे हैं।
मायावती का सेमीफाइनल और कांग्रेस का सीक्रेट ऑफर
2026 को बहुजन समाज पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह साल बसपा के लिए ‘सेमीफाइनल’ जैसा है। पार्टी सुप्रीमो मायावती इस दौरान कुछ कड़े और चौंकाने वाले फैसले ले सकती हैं। सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे की ओर से मायावती को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा गया है। कांग्रेस के एक धड़े का मानना है कि सपा के बजाय बसपा के साथ जाने से दलित-मुस्लिम समीकरण ज्यादा मजबूत हो सकता है। बताया जा रहा है कि संगठन को फिर से सक्रिय करने के लिए मायावती अपने भतीजे और संभावित उत्तराधिकारी आकाश आनंद को सड़कों पर उतार सकती हैं।
राज्यसभा और पंचायत चुनाव तय करेंगे 2027 की तस्वीर
इस साल होने वाले करीब 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव और पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाले माने जा रहे हैं। इन्हीं नतीजों से यह साफ होगा कि 2027 के फाइनल मुकाबले में कौन किसके साथ खड़ा होगा और किसे सबसे बड़ा सियासी झटका लगने वाला है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2026 सिर्फ एक साल नहीं, बल्कि आने वाले सत्ता संघर्ष की बुनियाद बनता दिख रहा है।
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