वाराणसी की दालमंडी मार्केट के चौड़ीकरण को लेकर सियासत तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आजीविका छीनने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने मुआवजे का भरोसा दिया। व्यापारी, विकास और राजनीति आमने-सामने आ गए हैं।

वाराणसी की पुरानी गलियों में फैली दालमंडी ना सिर्फ पूर्वांचल की सबसे बड़ी होलसेल मार्केट है, बल्कि वहां की अर्थव्यवस्था और रोज़मर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा भी है। ऐसे में जब से यहां चौड़ीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई, व्यापारियों की चिंताएं बढ़ने लगीं और सियासत भी उसी रफ्तार से गरमाने लगी। तंग गलियों और पुरानी दुकानों के बीच अब सवाल ये है कि विकास किसकी कीमत पर होगा और किसके लिए होगा।

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अखिलेश यादव का BJP पर हमला

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को दालमंडी चौड़ीकरण मुद्दे पर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे सरकार का “पॉलिटिकल प्रोजेक्ट” बताते हुए आरोप लगाया कि व्यापारी पिछले कई वर्षों से सरकारी फैसलों से परेशान हैं।

अखिलेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह योजना हेरिटेज बचाने की नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा कि बीजेपी उस बाजार से चुनाव नहीं जीत पाई, इसलिए अब वहां की आजीविका को खतरे में डाल रही है।

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‘डिवाइड एंड रुल की राजनीति की जा रही’

कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी दालमंडी के बहाने डिवाइड एंड रुल की नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी संकीर्ण सोच से चौड़ीकरण की बात कर रही है, जबकि स्थानीय व्यापारियों की इच्छा इसमें शामिल नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोग तैयार ही नहीं हैं तो किसी की आजीविका कैसे छीनी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो मुआवजे में दूसरी दुकान दे सकती है, लेकिन ग्राहक तो वापस नहीं दे पाएगी।

योगी सरकार का पलटवार

दूसरी ओर, योगी सरकार में मंत्री रविंद्र जायसवाल ने अखिलेश यादव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बनारस का मुसलमान चौड़ीकरण का समर्थन कर रहा है और विकास चाहता है। विपक्ष केवल उन्हें गुमराह कर रहा है। जायसवाल ने साफ कहा कि सरकार किसी को उजाड़ने का इरादा नहीं रखती, बल्कि न्यायोचित मुआवजा और आर्थिक मदद दी जाएगी। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी दी कि दालमंडी पर बेवजह राजनीति न करें और समुदायों को भड़काना बंद करें।

साथ ही उन्होंने 2012 में अखिलेश सरकार के दौरान सुंदरपुर, चितईपुर, लंका और भोजूबीर में हुए चौड़ीकरण और तोड़फोड़ का मुद्दा उठाते हुए जवाब मांगा। दालमंडी चौड़ीकरण का मामला अब विकास, आजीविका और सियासत—तीनों का संगम बन चुका है। व्यापारियों की चिंता, सरकार की योजनाएं और विपक्ष के आरोप आने वाले दिनों में इस विवाद को और भी पेचीदा बना सकते हैं।

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