UP Teacher Recruitment 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में 20 हजार नए शिक्षक और अनुदेशकों की भर्ती का ऐलान किया है। अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17 हजार रुपये किया गया है। साथ ही 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य बीमा सुविधा भी दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के लाखों छात्रों, शिक्षकों और अनुदेशकों के लिए राहत और उम्मीद भरी खबर देते हुए मुख्यमंत्री योगी ने 20 हजार नए शिक्षक और अनुदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है।

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राजधानी लखनऊ के लोकभवन सभागार में आयोजित 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सिर्फ स्कूलों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार लाना है। इसी दिशा में नए शिक्षकों की भर्ती, बढ़ा हुआ मानदेय और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी सुविधाएं लागू की जा रही हैं।

10 हजार नए शिक्षकों का प्रस्ताव भेजा गया

मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 हजार नए शिक्षकों का अधियाचन पहले ही शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा जा चुका है। इसके अलावा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नए अनुदेशकों की नियुक्ति भी की जाएगी, ताकि छात्र-शिक्षक अनुपात बेहतर हो सके और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा आयोग का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है, ताकि पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से शिक्षकों का चयन हो सके।

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अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17 हजार रुपये

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अंशकालिक अनुदेशकों के बढ़े हुए मानदेय और स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही मांगों को स्वीकार करते हुए सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। इसके साथ ही अनुदेशकों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने सभी अनुदेशकों से बेसिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर जल्द पंजीकरण कराने की अपील की, ताकि स्वास्थ्य कार्ड वितरण प्रक्रिया शुरू की जा सके।

2011 से 2022 तक नहीं बढ़ा था मानदेय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2011-12 में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति शुरू हुई थी। उस समय उन्हें 7 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था। उन्होंने कहा कि 2022 तक मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी। बाद में सरकार ने पहले 2 हजार रुपये की वृद्धि की और अब इसे बढ़ाकर 17 हजार रुपये कर दिया गया है।

बेसिक स्कूलों में बदली तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब उनकी सरकार बनी थी, तब बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों की स्थिति बेहद खराब थी। कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। लेकिन ‘स्कूल चलो अभियान’ और ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ जैसे अभियानों के जरिए आज प्रदेश के 96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पहले जहां ड्रॉपआउट दर 17 से 18 प्रतिशत तक थी, अब यह घटकर करीब 3 प्रतिशत रह गई है। सरकार का लक्ष्य इसे पूरी तरह शून्य तक लाना है।

बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे उसे पहचानकर सही दिशा दें। उन्होंने कहा कि बच्चों को जरूरत से ज्यादा कमजोर या ‘छुई-मुई’ बनाने के बजाय मजबूत, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। खेल, स्वच्छता, समय पालन और संस्कार भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

गरीब बच्चों और बेटियों की शिक्षा पर फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रमिकों और निराश्रित बच्चों के लिए 18 अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जहां हजारों बच्चे आधुनिक सुविधाओं के साथ शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा प्रत्येक जिले में मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं, जहां प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई, खेलकूद और स्किल डेवलपमेंट की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि गरीब परिवारों की बेटियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

“कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित रह जाता है, तो उसका असर सिर्फ एक परिवार पर नहीं बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलाव आने वाले भारत की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।

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