पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का उत्तराखंड से गहरा नाता था। देहरादून में उनके पारिवारिक संबंध और स्वामी राम से जुड़ाव उनके जीवन का अहम हिस्सा थे। वे उत्तराखंड को अपना दूसरा घर मानते थे।

गुरुवार रात, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हो गया, और इस खबर ने पूरे देश को गहरे शोक में डुबो दिया। डॉ. मनमोहन सिंह का उत्तराखंड से गहरा संबंध था, और इस राज्य से जुड़े उनके कई यादगार पल आज भी लोगों के दिलों में ताजे हैं। उत्तराखंड के लोग उन्हें न केवल एक महान नेता, बल्कि मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं।

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उत्तराखंड से था डॉ. मनमोहन सिंह का गहरा लगाव

उत्तराखंड के साथ डॉ. मनमोहन सिंह का एक अनोखा और भावनात्मक रिश्ता था। देहरादून के शांत वातावरण में जब भी उन्हें वक्त मिलता, वे अपने परिजनों के साथ समय बिताने के लिए यहां आ जाते थे। उनके चाचा, स्वर्गीय गोपाल सिंह कोहली का घर देहरादून के रेसकोर्स इलाके में था, वे अक्सर वहां ठहरते थे। उनकी चचेरी बहन, स्वर्गीय हरभजन सिंह कोहली और अमरजीत सिंह कोहली से भी उनका आत्मीय संबंध था।

स्वामी राम जी से जुड़ा था एक आत्मीय संबंध

उत्तराखंड में डॉ. मनमोहन सिंह का स्वामी राम जी के साथ भी गहरा जुड़ाव था, जो हिमालयन इंस्टीट्यूट, जौलीग्रांट के संस्थापक थे। स्वामी राम जी से मुलाकात के दौरान, वे अक्सर भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था पर विचार करते थे। उनके उत्तराखंड आगमन पर ये मुलाकातें लोगों के बीच बहुत चर्चा का विषय होती थीं। डॉ. मनमोहन सिंह को भारतीय अर्थव्यवस्था के नए युग का जनक माना जाता है। 1991 में जब भारत गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था, तब उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में साहसिक कदम उठाए और देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई अहम सुधार किए। उनकी नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया।

मनमोहन सिंह की गांवों की तस्वीर बदली योजनाएं 

डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल में कई ऐतिहासिक योजनाओं की शुरुआत हुई। 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (NREGA), जिसे अब MNREGA के नाम से जाना जाता है, की शुरुआत हुई। यह योजना ग्रामीण भारत में बेरोजगारी कम करने और लोगों की जिंदगी सुधारने का एक बड़ा कदम था। इसके अलावा, उन्होंने भारत में VAT प्रणाली लागू करके कर सुधारों को सरल और प्रभावी बनाया।

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