उत्तराखंड में डेटा आधारित शासन को मजबूत बनाने के लिए Data Harmonization कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि अब प्रशासन का मूल्यांकन नीयत नहीं, बल्कि परिणामों के आधार पर होगा। AI और डेटा समन्वयन पर भी विशेष जोर दिया गया।

उत्तराखंड सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में सोमवार को देहरादून में 'Data Harmonization-Building Data Linked Governance System' विषय पर आयोजित कार्यशाला में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट कहा कि आज के दौर में सरकारों का मूल्यांकन केवल उनकी नीतियों या मंशा से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले परिणामों से किया जाता है। इन परिणामों का सटीक आकलन गुणवत्तापूर्ण और समन्वित डेटा के बिना संभव नहीं है।

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चकराता रोड स्थित एक होटल में आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन अर्थ एवं संख्या निदेशालय और सीपीपीजीजी, नियोजन विभाग द्वारा किया गया। इसमें केंद्र सरकार, नीति आयोग, विश्व बैंक और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

उत्तराखंड की चुनौतियों के लिए डेटा बनेगा मजबूत आधार

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां, आपदा संवेदनशीलता, पलायन और पर्यावरणीय चुनौतियां अन्य राज्यों से अलग हैं। ऐसे में केवल घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने के बजाय डेटा आधारित पूर्वानुमान और योजना निर्माण की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकें डेटा समन्वयन को नई दिशा दे सकती हैं। हालांकि इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब डेटा की गुणवत्ता, गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी विभागों को सांख्यिकीय कार्यों से जुड़े अधिकारियों को नोडल अधिकारी के रूप में चिन्हित कर उनके क्षमता विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए।

नीति आयोग और केंद्र सरकार ने की पहल की सराहना

कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने उत्तराखंड की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यशाला के बाद डेटा हार्मोनाइजेशन पर गंभीरता से काम शुरू करने वाले राज्यों में उत्तराखंड अग्रणी है। यह साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और बेहतर प्रशासनिक निर्णयों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार अन्ना रॉय ने कहा कि केवल डेटा संग्रह पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही विश्लेषण और व्याख्या भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्य सरकार को तकनीकी सहयोग देने का आश्वासन दिया।

कार्यशाला के दौरान तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों ने डेटा प्रबंधन, नीति निर्माण और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। समापन सत्र में राज्य की आगामी कार्ययोजना का खाका भी प्रस्तुत किया गया।