WDC-PMKSY 2.0 के तहत उत्तराखंड की 15 वाटरशेड परियोजनाओं में तेजी के निर्देश मिले हैं। केंद्र ने 30 सितंबर 2026 तक काम पूरा करने पर जोर दिया।
उत्तराखंड में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए चल रही प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक (WDC-PMKSY 2.0) को लेकर केंद्र सरकार ने राज्य से काम में तेजी लाने को कहा है। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर स्वीकृत परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने और जारी केंद्रीय सहायता का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
केंद्र की चिंता खास तौर पर उन वाटरशेड परियोजनाओं को लेकर है, जिनके तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े काम अभी पूरे होने बाकी हैं। केंद्र ने राज्य को उपलब्ध समय और मानसून की परिस्थितियों का अधिकतम लाभ उठाने की सलाह दी है।
WDC-PMKSY 2.0 के तहत उत्तराखंड में 15 परियोजनाएं स्वीकृत
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्र में बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच उत्तराखंड के लिए WDC-PMKSY 2.0 के तहत 15 वाटरशेड परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से करीब 0.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत 232.26 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 209.03 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। राज्य को अब तक करीब 113.48 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है।
Watershed Project की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ी
इन परियोजनाओं की मूल समयसीमा 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी थी। बाकी काम पूरे करने के लिए केंद्र सरकार ने परियोजनाओं की अवधि बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी है। केंद्र ने इसे महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा है कि इस अवधि में लंबित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्यों को पूरा किया जा सकता है और परियोजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में तेजी लाई जा सकती है।
Uttarakhand को चालू वित्त वर्ष में 31.58 करोड़ की केंद्रीय सहायता
चौहान ने पत्र में यह भी बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में WDC-PMKSY 2.0 के तहत उत्तराखंड के लिए 31.58 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता आवंटित की गई है। इसमें से 15.79 करोड़ रुपये की राशि परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन के लिए मदर सैंक्शन के रूप में पहले ही जारी की जा चुकी है। अब राज्य सरकार से अपेक्षा की गई है कि उपलब्ध राशि का इस्तेमाल जमीन पर चल रहे कामों को तेजी से पूरा करने में किया जाए।
मानसून में Rain Water Harvesting और Groundwater Recharge पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री ने मौजूदा मानसून परिस्थितियों को देखते हुए जल संरक्षण के कामों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान उपलब्ध पानी का ज्यादा से ज्यादा संरक्षण किया जाए, ताकि ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत किया जा सके। इसके लिए वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, मृदा नमी संरक्षण और सूखा-रोधी उपायों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
Check Dam से Farm Pond तक, इन कामों में तेजी लाने के निर्देश
केंद्र ने वाटरशेड परियोजनाओं के तहत कई तरह की जल और मृदा संरक्षण संरचनाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया है। इनमें चेक डैम, फार्म पॉण्ड, खेत तालाब, परकोलेशन टैंक और अन्य जल संचयन संरचनाएं शामिल हैं। इसके अलावा ड्रेनेज लाइन ट्रीटमेंट तथा मिट्टी और नमी संरक्षण से जुड़े दूसरे कार्यों को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इन कामों का सीधा उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने से रोकना और उसे स्थानीय स्तर पर उपयोगी बनाना है।
WDC-PMKSY 3.0 में नई परियोजनाओं के लिए प्रदर्शन होगा अहम
केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को यह भी संकेत दिया है कि मौजूदा परियोजनाओं का प्रदर्शन आगे की केंद्रीय सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। स्वीकृत कार्यों को पूरा करने की गति, जारी केंद्रीय राशि का उपयोग और परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति को WDC-PMKSY 3.0 के तहत भविष्य में परियोजनाओं के आवंटन का अहम आधार माना जाएगा।
इतना ही नहीं, चालू वित्तीय वर्ष में राज्यों के बीच केंद्रीय सहायता के पुनः आवंटन का फैसला भी कार्यान्वयन की स्थिति को देखते हुए किया जाएगा। बेहतर गति से काम करने और उपलब्ध धनराशि का प्रभावी इस्तेमाल करने वाले राज्यों को अतिरिक्त आवंटन में प्राथमिकता देने पर भी विचार किया जाएगा।
अधिकारियों को लंबित Watershed Works पूरे करने के निर्देश देने का अनुरोध
केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राज्य के संबंधित विभागों और क्षेत्रीय स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों-कर्मचारियों को जरूरी निर्देश देने का अनुरोध किया है। खास तौर पर शेष वाटरशेड कार्यों और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कामों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा करने पर जोर दिया गया है। साथ ही पहले जारी की जा चुकी केंद्रीय सहायता का शत-प्रतिशत प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
केंद्र ने उत्तराखंड को हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा
शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा जताया है कि मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार मानसून की मौजूदा परिस्थितियों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, मृदा संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जुड़े कामों को गति देगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि भारत सरकार का भूमि संसाधन विभाग उत्तराखंड को इन परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में हरसंभव सहयोग और सहायता उपलब्ध कराएगा।
CM Dhami ने केंद्र सरकार का जताया आभार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक को प्रभावी तरीके से लागू करने में केंद्र सरकार की ओर से दिए जा रहे सहयोग के लिए केंद्रीय सरकार और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया है। राज्य के लिए अब चुनौती उन परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने की है, जिनकी अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के कामों में तेजी के साथ ही केंद्रीय सहायता के प्रभावी इस्तेमाल पर भी सरकार का फोकस रहेगा।


