मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई जिलों में अगले दो दिनों के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
देहरादून। मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो दिनों के लिए उत्तराखंड में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन और पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन से बात की। सीएम ने सभी संबंधित जिलों और विभागों को तुरंत जरूरी एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
सीएम धामी ने रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में अधिकारियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जाए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव की पूरी तैयारी पहले से होनी चाहिए। इसके अलावा, जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को एक्टिव रखने और मौसम की चेतावनी तुरंत स्थानीय स्तर पर पहुंचाने को भी कहा गया है।
आपदा प्रबंधन और पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने भी सचिव विनोद कुमार सुमन से बात करके राज्य में मौसम और तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को मौसम पर पैनी नजर रखने और किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, सचिव विनोद कुमार सुमन ने शुक्रवार को सभी 13 जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें अलर्ट मोड पर रहने को कहा। मौसम विभाग के मुताबिक, 26 सितंबर को 5 जिलों में रेड अलर्ट, 5 में ऑरेंज और 3 जिलों में येलो अलर्ट है। वहीं, 27 सितंबर को 4 जिलों में रेड, 4 में ऑरेंज और 5 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
26 सितंबर को बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और उधम सिंह नगर में रेड अलर्ट है। देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोड़ा में ऑरेंज अलर्ट, जबकि हरिद्वार, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल में येलो अलर्ट है।
27 सितंबर को देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार में रेड अलर्ट रहेगा। उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में ऑरेंज अलर्ट और बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, उधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड और रास्ते बंद होने, नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने और मैदानी इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए प्रशासन को खास सतर्क रहने को कहा गया है। सचिव सुमन ने सभी जिलों को संवेदनशील इलाकों की निगरानी करने और मौसम की हर चेतावनी को ग्राउंड लेवल तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों से कहा गया है कि वे नदियों, नालों, गाड़-गदेरों और जलस्रोतों के जलस्तर पर नजर रखें। अगर पानी बढ़ता है, तो आसपास रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जाए। लैंडस्लाइड वाले रास्तों पर जेसीबी और जरूरी मशीनें पहले से तैनात रखने को कहा गया है ताकि रास्ता बंद होने पर उसे तुरंत खोला जा सके।
सभी जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को 24 घंटे चालू रखने के निर्देश हैं। पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF), फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग (PWD), पेयजल और बिजली विभाग के बीच लगातार तालमेल बनाए रखने को कहा गया है। जरूरत के हिसाब से संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव टीमों को उपकरणों के साथ तैनात किया जाना चाहिए।
सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि पहाड़ी रास्तों पर मौसम और सड़क की स्थिति देखकर ही ट्रैफिक कंट्रोल किया जाए। भारी बारिश और लैंडस्लाइड वाले इलाकों में गैर-जरूरी सफर से बचने की सलाह दी गई है। नदियों और बरसाती नालों के पास रहने वाले लोगों को लगातार अलर्ट किया जाए और उन्हें तेज बहाव वाले पानी या नदी किनारों पर जाने से रोका जाए।
तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए चारधाम यात्रा रूट, प्रमुख पर्यटन स्थलों और अन्य संवेदनशील इलाकों में खास निगरानी रखने को कहा गया है। आपात स्थिति में कम से कम समय में राहत और बचाव कार्य शुरू करने के लिए सभी तैयारियां पहले से पूरी होनी चाहिए।
सुमन ने जिला प्रशासन से पूरी तरह अलर्ट रहने और मौसम को देखते हुए कोई भी लापरवाही न बरतने को कहा है। उन्होंने जनता से भी अपील की है कि वे मौसम विभाग और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें, बेवजह सफर न करें और नदियों, नालों और लैंडस्लाइड वाले इलाकों से दूर रहें।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र मौसम के हालात पर लगातार नजर रख रहा है। किसी भी आपात स्थिति में लोग राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के टोल-फ्री नंबर 1070, जिला आपातकालीन संचालन केंद्र के 1077 या इमरजेंसी सर्विस 112 पर संपर्क कर सकते हैं।


