मेटा 'क्रिएटर फास्ट ट्रैक' प्रोग्राम से दूसरे प्लेटफॉर्म्स के क्रिएटर्स को फेसबुक पर ला रहा है। 20,000+ फॉलोअर्स वाले क्रिएटर्स 30 दिन में 15 रील्स पोस्ट कर हर महीने 2.7 लाख रु. तक कमा सकते हैं।

कैलिफोर्निया: मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स, फेसबुक पर ज्यादा कंटेंट क्रिएटर्स को खींचने के लिए एक नया प्लान लेकर आई है। जुकरबर्ग ने ऐलान किया है कि जो कंटेंट क्रिएटर्स इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब पर एक्टिव हैं, उन्हें अब फेसबुक पर कंटेंट पोस्ट करने के लिए हर महीने 2.7 लाख रुपये तक दिए जाएंगे।

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मेटा क्रिएटर फास्ट ट्रैक से पैसे कैसे कमाएं?

मेटा ने इस प्रोग्राम को ‘क्रिएटर फास्ट ट्रैक’ नाम दिया है। कंपनी ने यह कदम तब उठाया है जब उसने खुद माना कि आजकल कई क्रिएटर्स फेसबुक से ज्यादा दूसरे प्लेटफॉर्म्स को तरजीह दे रहे हैं। कंपनी की जानकारी के मुताबिक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक या यूट्यूब पर कम से कम 20,000 फॉलोअर्स वाले कंटेंट क्रिएटर्स इस प्रोग्राम में शामिल हो सकते हैं। शुरुआत में कमाई 100 डॉलर (करीब 9,300 रुपये) से शुरू होगी।

लेकिन, जिन क्रिएटर्स के फॉलोअर्स ज्यादा हैं, उन्हें कमाई भी ज्यादा होगी। एक लाख फॉलोअर्स वाले क्रिएटर्स को हर महीने 1,000 डॉलर (करीब 92,000 रुपये) मिलेंगे। वहीं, 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स वाले क्रिएटर्स 3,000 डॉलर (करीब 2.78 लाख रुपये) तक कमा सकते हैं। लेकिन सिर्फ अकाउंट बनाना ही काफी नहीं होगा। क्रिएटर्स को रेगुलर पोस्ट करना होगा। शर्त यह है कि 30 दिनों के अंदर फेसबुक पर कम से कम 15 ओरिजिनल रील्स पोस्ट करनी होंगी, और ये रील्स कम से कम 10 अलग-अलग दिनों में पब्लिश होनी चाहिए। यह फाइनेंशियल मदद सिर्फ तीन महीने के लिए मिलेगी। लेकिन इसके बाद भी क्रिएटर्स को फेसबुक के दूसरे कंटेंट कमाई वाले प्रोग्राम्स में हिस्सा लेने का मौका मिलता रहेगा। मेटा ने यह भी साफ किया है कि कंपनी ज्यादा दर्शकों तक पहुंचने में भी मदद करेगी।

मार्च 2025 में मार्क जुकरबर्ग ने खुलकर कहा था कि कई कंटेंट क्रिएटर्स फेसबुक को अपना मेन प्लेटफॉर्म नहीं मानते हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सबसे बड़ा मौका फेसबुक पर ही है। कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में मेटा ने कंटेंट क्रिएटर्स को करीब तीन बिलियन डॉलर दिए, जिसमें से 60 फीसदी हिस्सा रील्स के लिए था। इसके अलावा, कंपनी ने ‘क्वालिफाइड व्यूज’ नाम का एक नया मेट्रिक भी पेश किया है। इसके जरिए उन व्यूज की पहचान की जा सकेगी जो असल में कमाई के लायक हैं।