एक B.Tech छात्र ने घूसखोरी की रिपोर्ट के लिए एक वेबसाइट बनाई है। यह प्लेटफॉर्म लोगों को रिश्वत के अनुभव साझा करने की अनुमति देता है। अब तक मिली 616 रिपोर्टों में पुलिस विभाग के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें हैं।
सरकारी दफ्तरों में अगर आपसे कोई घूस मांगता है, तो अब आप अपना अनुभव সবার सामने ला सकते हैं। इसके लिए एक नई वेबसाइट काफी चर्चा में है, जिस पर लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई ऐसी घटनाओं के बारे में पढ़ भी सकते हैं। इस अनोखी पहल के पीछे महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के B.Tech स्टूडेंट आर्यन निषाद हैं।
यह वेबसाइट खुद को एक फ्री पब्लिक प्लेटफॉर्म बताती है, जहां लोग घूस देने या देने से मना करने के अपने अनुभव शेयर कर सकते हैं। इसका मकसद सरकारी विभाग, शहर और राज्य के हिसाब से जानकारी इकट्ठा करना है, ताकि देश में रिश्वतखोरी के ट्रेंड को जनता के सामने लाया जा सके।
एक मिनट में करें रिपोर्ट
घूस मांगने की घटना की रिपोर्ट करना बेहद आसान है। आपको बस सरकारी विभाग का नाम, मांगी गई रकम और शहर जैसी बेसिक जानकारी देनी होगी। साथ ही, यह भी बता सकते हैं कि आपने घूस दी या नहीं। वेबसाइट का दावा है कि रिपोर्ट सबमिट करने में करीब एक मिनट का ही समय लगता है। लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी हटाने के बाद ही इन रिपोर्ट्स को पब्लिक डेटाबेस में डाला जाता है, जिसे कोई भी देख सकता है।
251 शहरों से 616 रिपोर्टें
वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 251 शहरों से 616 रिपोर्टें मिल चुकी हैं। हालांकि, वेबसाइट पर यह भी साफ लिखा है कि ये आंकड़े यूजर्स ने खुद दिए हैं, इसलिए इन्हें भारत में भ्रष्टाचार का असल पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। इस प्लेटफॉर्म पर आप अलग-अलग सरकारी विभागों और इलाकों में रिपोर्ट किए गए अनुभवों की तुलना भी कर सकते हैं। एक नक्शा भी दिया गया है, जो दिखाता है कि देश के किन इलाकों से घूस की कितनी रिपोर्टें आई हैं।
पुलिस के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस विभाग के खिलाफ मिली हैं। पुलिस से जुड़ी 337 रिपोर्टें दर्ज की गई हैं। इसके बाद रोड ट्रांसपोर्ट विभाग (88 रिपोर्ट), रेवेन्यू और लैंड रिकॉर्ड्स विभाग (69 रिपोर्ट), पासपोर्ट ऑफिस (43 रिपोर्ट) और नगर निगम (29 रिपोर्ट) का नंबर आता है। रिपोर्ट किए गए मामलों में से 38% में यूजर्स ने घूस देने से इनकार कर दिया। कुछ मामलों में तो लोगों ने यह भी बताया कि घूस न देने के बावजूद उनका सरकारी काम हो गया।
सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा
सोशल मीडिया पर कई लोग इस नई पहल की तारीफ कर रहे हैं। कुछ का मानना है कि ऐसे पब्लिक प्लेटफॉर्म से सरकारी अधिकारियों में घूस मांगने को लेकर डर पैदा होगा। वहीं, कुछ लोगों ने वेबसाइट पर पब्लिश हो रही रिपोर्ट्स की सच्चाई पर सवाल भी उठाए हैं। उनकी चिंता है कि रिपोर्ट की जांच कैसे होगी, क्योंकि फिलहाल रिपोर्ट करने वाला खुद ही अपने अनुभव के सच होने की पुष्टि करता है।
बार-बार आने वाली शिकायतों पर नजर
वेबसाइट में एक ऐसा सिस्टम भी है, जिससे यह पता चल सकता है कि किसी एक सरकारी विभाग या ऑफिस के खिलाफ बार-बार एक जैसी शिकायतें तो नहीं आ रहीं। इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य घूस से जुड़े निजी अनुभवों को एक जगह इकट्ठा करके जनता तक पहुंचाना है। लेकिन वेबसाइट यह चेतावनी भी देती है कि ये सभी रिपोर्टें यूजर्स ने अपनी मर्जी से दी हैं, इसलिए इन्हें भ्रष्टाचार के आधिकारिक आंकड़ों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
