सरकार ने 83 नए सुरक्षा नियमों के तहत स्मार्टफोन कंपनियों से सोर्स कोड मांगा है। इसका उद्देश्य साइबर हमलों से सुरक्षा बढ़ाना है। कंपनियां बौद्धिक संपदा (IP) और प्राइवेसी चिंताओं का हवाला देते हुए इस कदम का विरोध कर रही हैं।

नई दिल्ली: मोबाइल कंपनियों ने स्मार्टफोन का सोर्स कोड शेयर करने जैसी केंद्र सरकार की नई मांगों का विरोध किया है। न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने फोन कंपनियों को डिवाइस का सोर्स कोड शेयर करने और उनके सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव करने का निर्देश दिया है। रॉयटर्स की खबर में यह भी कहा गया है कि सरकार के इस कदम से एप्पल, सैमसंग और शाओमी जैसी ग्लोबल स्मार्टफोन कंपनियों में काफी चिंता और विरोध है।

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83 सुरक्षा नियम

जानकारी के मुताबिक, स्मार्टफोन यूज़र्स की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, भारत सरकार ने टेलीकॉम सिक्योरिटी एश्योरेंस रिक्वायरमेंट्स (ITSAR) के तहत सोर्स कोड की जांच समेत 83 सुरक्षा नियम सुझाए हैं। इसके मुताबिक, कंपनियों को अपने डिवाइस का सोर्स कोड सरकार के साथ शेयर करना होगा। दावा है कि इसका मकसद स्मार्टफोन्स को साइबर हमलों, डेटा चोरी और जासूसी से बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित डिजिटल डिवाइस बनाना है।

कंपनियां क्यों कर रही हैं विरोध?

कई स्मार्टफोन कंपनियों ने इस नए कदम का विरोध किया है। कंपनियों का तर्क है कि ये नियम न सिर्फ अव्यावहारिक हैं, बल्कि सुरक्षा के नाम पर डेटा प्राइवेसी के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा करते हैं। कंपनियां बौद्धिक संपदा अधिकारों (IP) को लेकर भी चिंता जता रही हैं। सोर्स कोड किसी भी कंपनी का सबसे बड़ा कारोबारी राज होता है। कंपनियों को डर है कि इसे शेयर करने से उनकी टेक्नोलॉजी पब्लिक हो सकती है। इसके अलावा, कंपनियों का कहना है कि फोन के बैकग्राउंड में लगातार मैलवेयर स्कैनिंग टूल चलाने से फोन की बैटरी जल्दी खत्म होगी और प्रोसेसिंग स्पीड भी कम हो जाएगी। टेक कंपनियों का यह भी कहना है कि यूरोपीय संघ, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे सख्त नियमों वाले बाजारों में भी ऐसे प्रावधान नहीं हैं।

जल्द होगी बैठक

केंद्र सरकार द्वारा 2023 में तैयार किए गए सुरक्षा नियम अब चर्चा का विषय बन गए हैं। सरकार इन्हें कानूनी तौर पर लागू करने पर विचार कर रही है। खबरों के मुताबिक, आगे की बातचीत के लिए आईटी मंत्रालय और टेक एग्जीक्यूटिव मंगलवार को एक बैठक करेंगे।