Social Media Age Restrictions: किसने और क्यों 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लगाया? कौन-कौन से ऐप्स इस नए नियम में शामिल हैं? क्या YouTube, Instagram और X जैसे प्लेटफॉर्म भी बंद होंगे? सोशल मीडिया कर्फ्यू क्या है और यह कैसे काम करेगा? क्या पैरेंट्स इस फैसले का सपोर्ट कर रहे हैं?

Social Media Ban UK Children: आज के समय में बच्चों को स्मार्टफोन और रील्स की ऐसी लत लग चुकी है कि पैरेंट्स चाहकर भी उन्हें स्क्रीन से दूर नहीं रख पा रहे हैं, लेकिन अब बच्चों की इसी लत पर लगाम लगाने के लिए UK की सरकार ने बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। नया नियम आने के बाद 16 साल से कम उम्र के बच्चे न तो रील्स देख पाएंगे, न ही स्क्रॉलिंग कर पाएंगे। इतना ही नहीं, सरकार अब 'सोशल मीडिया कर्फ्यू' लगाने की भी सोच कर रही है, जिसका मतलब है कि रात होते ही बच्चों के फोन में ये ऐप्स काम करना बंद कर देंगे। ब्रिटेन सरकार का नया नियम ठीक उसी तरह काम करेगा जैसा दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने लागू किया था। इसके तहत बच्चों के फेवरेट और सबसे ज्यादा यूज होने वाले 10 बड़े प्लेटफॉर्म्स पर 'कर्फ्यू' लग जाएगा।

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सोशल मीडिया बैन करने का कारण?

बच्चों की भलाई और उनकी मेंटल हेल्थ को सुधारने के लिए यह बड़ा कदम ब्रिटेन (UK) की सरकार ने उठाया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने कहा है कि पुराना सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका था और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए यह कड़ा फैसला लेना बेहद जरूरी था। ब्रिटेन अब दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और मलेशिया भी अपने यहाँ ऐसे कड़े नियम लागू कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दायरे में 10 बड़े प्लेटफॉर्म आ सकते हैं।

कौन-कौन से 10 बड़े ऐप्स बच्चों के लिए बैन हो जाएंगे?

इंस्टाग्राम (Instagram)

यूट्यूब (YouTube)

टिकटॉक (TikTok)

स्नैपचैट (Snapchat)

Reddit

Twitch

X (Twitter)

Threads

फेसबुक (Facebook)

Kick

सिर्फ बैन नहीं, रात में लगेगा ‘सोशल मीडिया कर्फ्यू’

ब्रिटेन सरकार सिर्फ ऐप्स को बंद करके नहीं रुक रही है। सरकार का यह ऑस्ट्रेलिया के प्लान से भी दो कदम आगे है। इसके तहत बड़े किशोरों (Older Teenagers) के लिए रात के समय सोशल मीडिया पर 'कर्फ्यू' लगाने की तैयारी है, ताकि बच्चे रात में जागकर चैटिंग या रील्स न देख सकें। इसके अलावा, AI चैटबॉट्स के इस्तेमाल पर भी कड़ी लिमिट तय की जाएगी।

90% पैरेंट्स ने कहा- 'बैन करो ये आफत'

इस कड़े कानून को बनाने से पहले सरकार ने 3 महीने तक एक बड़ा सर्वे किया था, जिसमें करीब 1 लाख 16 हजार लोगों ने अपनी राय दी। इस सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले और आंखें खोलने वाले थे। 90% माता-पिता ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का खुलकर समर्थन किया। 83% से ज्यादा लोगों का मानना था कि सोशल मीडिया के फायदों से कहीं ज्यादा उसके नुकसान और खतरे हैं। पैरेंट्स का कहना है कि रील्स का 'इन्फिनिट स्क्रॉल' (लगातार नीचे खिसकाते जाना) और वीडियो का 'ऑटोप्ले' (एक के बाद एक वीडियो खुद चलना) जैसी खूबियां बच्चों को फोन का गुलाम बना रही हैं।

गेमिंग ऐप्स पर अनजान लोगों से बात करने पर भी रोक

नए नियमों के मुताबिक, सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं बल्कि ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स पर भी नकेल कसी जाएगी। अब बच्चे गेम खेलते समय किसी भी अनजान अजनबी (Stranger) से बातचीत या चैटिंग नहीं कर पाएंगे। इसके साथ ही, सेफ माने जाने वाले प्लेटफॉर्म्स पर भी लाइव-स्ट्रीमिंग करने पर कड़े प्रतिबंध रहेंगे, ताकि बच्चों को ऑनलाइन शोषण और अश्लीलता से पूरी तरह बचाया जा सके। हालांकि, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतने कड़े प्रतिबंधों से बच्चों के लिए नई मुश्किलें भी खड़ी हो सकती हैं, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि उनके लिए परिवारों का साथ देना और बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना सबसे पहली प्रॉयरिटी है।