अमेरिकी स्टार्टअप 'टॉर्नयोल' ने मच्छरों का शिकार करने वाला ऑटोमैटिक माइक्रो-ड्रोन बनाया है। 40 ग्राम का यह ड्रोन आवाज से कीड़ों को पहचानकर हवा में मार गिराता है। यह तकनीक 100 गुना सस्ती है और इसका लक्ष्य मच्छरों का सफाया करना है।

Mosquito Control Technology: इंसानों के सबसे बड़े दुश्मन यानी मच्छरों को अब हवा में ही मार गिराया जाएगा। अमेरिका की एक स्टार्टअप कंपनी 'टॉर्नयोल' (Tornyol) एक ऐसी ही नई तकनीक लेकर आई है। जो चीज़ें कभी साइंस-फिक्शन फिल्मों में दिखती थीं, अब वो हकीकत बन रही हैं। कंपनी ने एक ऐसा ऑटोमैटिक माइक्रो-ड्रोन बनाया है जो कीड़ों का पीछा करके उनका शिकार कर सकता है। इसका सफल टेस्ट भी कर लिया गया है।

पहला शिकार बना एक पतंगा

टेस्टिंग के दौरान इस नन्हे ड्रोन ने हवा में उड़ रहे एक पतंगे (moth) को सटीकता से टक्कर मारकर गिरा दिया। दुनिया के मशहूर स्टार्टअप इनक्यूबेटर 'Y Combinator' ने इस कंपनी में पैसा लगाया है। टॉर्नयोल की इस कामयाबी को भविष्य में जानलेवा बीमारियां फैलाने वाले मच्छरों को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वजन सिर्फ 40 ग्राम, खर्च 100 गुना कम!

एलेक्स टूसेन्ट (Alex Toussaint) और क्लोविस पीडालू (Clovis Piedallu) नाम के दो इंजीनियरों ने इन ड्रोन्स को डिजाइन किया है। इनका वजन सिर्फ 40 ग्राम है। कंपनी का दावा है कि मच्छर खत्म करने के मौजूदा तरीकों के मुकाबले यह ड्रोन टेक्नोलॉजी 100 गुना तक सस्ती पड़ेगी।

ये ड्रोन कीड़ों को ट्रैक करने के लिए स्मार्टफोन वाले माइक्रोफोन, कारों के पार्किंग सिस्टम में लगे अल्ट्रासोनिक सेंसर और एक एडवांस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। कंपनी का अनुमान है कि ऐसे 10 ड्रोन मिलकर एक वर्ग किलोमीटर के दायरे से मच्छरों का पूरी तरह सफाया कर सकते हैं।

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यह हैरान करने वाला टेस्ट पिछली 14 जुलाई को किया गया था। एलेक्स टूसेन्ट ने इसका एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें ड्रोन एक लैब के अंदर खुद ही एक कीड़े का पीछा करके उसे खत्म कर रहा है। एलेक्स ने इस कामयाबी को कंपनी का पहला "एयर-टू-एयर किल" (हवा से हवा में मार गिराना) बताया। फिलहाल यह टेस्ट कंप्यूटर और मोशन-कैप्चर कैमरों की मदद से किया गया है, लेकिन इंजीनियरों का कहना है कि कुछ ही हफ्तों में यह पूरी तकनीक ड्रोन के अपने इन-बिल्ट हार्डवेयर पर काम करने लगेगी।

नर-मादा मच्छर की भी पहचान कर लेगा

ये ड्रोन अल्ट्रासोनिक तरंगें छोड़ते हैं और कीड़ों के पंख फड़फड़ाने की आवाज से पैदा होने वाली गूंज का विश्लेषण करके अपने शिकार का पता लगाते हैं। इस आवाज के फर्क से ड्रोन न सिर्फ मच्छरों को दूसरे कीड़ों से अलग पहचान सकते हैं, बल्कि यह भी पता लगा सकते हैं कि मच्छर किस प्रजाति का है और वो नर है या मादा। टॉर्नयोल का लक्ष्य ऐसे ड्रोन्स के बड़े झुंड का इस्तेमाल करके भविष्य में शहरी इलाकों को पूरी तरह से मच्छर-मुक्त बनाना है।