Gas Tragedy Bhopal  

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    Madhya PradeshDec 4, 2020, 10:38 AM IST

    गजब का जज्बा: जिन्हें 2 बार मौत छू भी नहीं पाई, हजारों लाशों के बीच बचे जिंदा..अब कोरोना को दी मात

    ऐसे जिंदादिल इंसान हैं 66 वर्षीय अरुणकांत मिश्रा, जो दिव्यांग हैं, लेकिन उनके जज्बे के चलते मौत उनको छू भी नहीं पाई। 36 साल पहले 1984 में जब गैस त्रासदी हुई तो अरुणकांत भोपाल में ही थे।

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    Madhya PradeshDec 3, 2020, 11:16 AM IST

    गैस त्रासदी: 10 तस्वीरों में देखिए भोपाल की वो भयावह रात, जब लाशें ढोने को गाड़ियां और कफन कम पड़ गए

    भोपाल. (मध्य प्रदेश). 36 साल पहले भोपाल गैस कांड की उस काली रात को शायद ही कोई भूल पाएगा। जहां अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के प्लांट नंबर सी के टैंक नंबर 610 से लीक हुई मिथाइल आइसोसाइनेट गैस की वजह से हजारों लोगों की जान चली गई और कई परिवार देखते ही देखते तबाह हो गए। मंजर इतना भयावह था कि लाशें ढोने के लिए गाड़ियां छोटी पड़ गईं और अस्पताल में लोगों को भर्ती करने के लिए  जगह नहीं बची। साथ ही कफन भी कम पड़ गए। त्रासदी की 36वीं बरसी पर 10 तस्वीरों में देखिए कैसे जिंदगी भर का दर्द दे गई गैस...इन फोटोज को सीनियर फोटोग्राफर कमलेश जैमिनी ने अपने कैमरे में कैद किया था...

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    Madhya PradeshDec 3, 2020, 10:02 AM IST

    भोपाल त्रासदी: बच्चे ने जलन से आंखें मल रही मां को देखकर नानी से पूछा-वो क्या प्याज काट रही हैं?

    भोपाल. कांड की 36 साल पूरे हो गए हैं। 2-3 दिसंबर, 1984 की वो रात और अगली सुबह शायद ही कोई भूल पाए। खासकर वो लोग, जिन्होंने उस काली सुबह को भोगा है। अपनी आंखों से गली-चौराहे पर पड़ीं लाशों को देखा है। रोते-बिलखते और यहां-वहां भागते लोगों का सामना किया है। ये किस्से भोपाल गैस कांड के वक्त नायब तहसीलदार रहीं शमीम जहरा ने शेयर किए हैं। शमीम के पति स्वर्गीय शकील रजा तब शहडोल के एसपी थे। जहरा 2009 में भोपाल से डिप्टी कलेक्टर की पोस्ट से सेवानिवृत्त हुई हैं। पढ़िए भोपाल त्रासदी और उसके बाद की कहानी, उनकी आंखों देखी जुबानी...

  • Emotional story of Bhopal gas tragedy, retired deputy collector Shamim Jahra and duty

    Madhya PradeshDec 3, 2019, 1:47 PM IST

    उस डरावनी सुबह को याद कर रो पड़ीं पूर्व अफसर, कहा, 'जिंदा इंसान भी लाशों के बीच मुर्दा जैसा पड़ा था

    2-3 दिसंबर 1984 की सुबह शायद ही कोई भूल पाए। खासकर वो लोग, जिन्होंने उस काली सुबह को भोगा है। अपनी आंखों से गली-चौराहे पर पड़ीं लाशों को देखा है। रोते-बिलखते और यहां-वहां भागते लोगों का सामना किया है। पढ़िए 'भोपाल गैस कांड' से जुड़े कुछ किस्से...

  • Unknown facts about Bhopal gas tragedy no one knows

    HatkeDec 3, 2019, 9:23 AM IST

    लोगों से छिपाई गई दर्दनाक भोपाल गैस त्रासदी से जुड़ी ये 8 बातें, नहीं जानते हैं ज्यादा लोग

    भोपाल: 2 दिसंबर 1984 का दिन पूरे भारत के लोगों के लिए मनहूस साबित हुआ। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाले लोग खाना खाकर सो तो गए लेकिन ऐसे कई लोग भी थे, जो अगली सुबह देख नहीं पाए। 2 दिसंबर की रात 12 बजे जेपी नगर के सामने बने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूका) के कारखाने में एक टैंक से ज़हरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) लीक हो गई थी, जिसकी वजह से करीब आठ हजार लोगों की जान गई। लेकिन ये तो सरकारी आंकड़ा है। कई लोगों का दावा है कि इस हादसे में 25 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। आज हम आपको इस हादसे से जुड़ी वो 10 बातें बताने जा रहे हैं, जिन्हें काफी कम लोग ही जानते हैं। 

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    Madhya PradeshDec 2, 2019, 9:23 PM IST

    जानिए क्या है भोपाल गैस त्रासदी, जहरीली गैस से लग गए थे लाशों के ढेर

    भोपाल. भारत के इतिहास में 1984 में 2 दिसंबर की रात और 3 दिसंबर की अगली सुबह भोपाल शहर में सड़कों पर लाशों के ढेर लगे हुए थे। ये भोपाल गैस त्रासदी थी जिसे दुनिया की अब तक की सबसे खतरनाक ट्रेजेडी माना जाता है। इसमें करीब 8000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, अपाहिज हो चुके सैकड़ों लोग आज भी इसका दंश झेल रहे हैं। 2 दिसंबर की रात 12 बजे जेपी नगर के सामने बने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूका) के कारखाने में एक टैंक से ज़हरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) लीक हो गई थी जिसके हवा में घुलने के कारण इंसान और जानवर मौत की नींद सोते चले गए थे।