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Rani Kamalapati कौन थीं- स्टेशन का नाम Habibganj कैसे पड़ा, एक्सपर्ट ने बताया पूरा इतिहास

Habibganj Railway Station का नाम भोपाल की अंतिम गोंड शासक रानी कमलापति के नाम पर होगा। केंद्र की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है। 15 नवंबर को पीएम मोदी इसका लोकार्पण करेंगे।

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Bhopal, First Published Nov 13, 2021, 12:48 PM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हबीबगंज रेलवे स्टेशन (Habibganj Railway Station) का नाम बदलने का फैसला किया गया है। अब स्टेशन का नाम रानी कमलापति (Rani Kamlapati) के नाम पर होगा। पीएम मोदी  (PM Modi) 15 नंवबर को इसका लोकार्पण करेंगे। हबीबगंज देश का पहला आईएसओ 9001 सर्टिफाइड रेलवे स्टेशन है। यहां कई बड़ी ट्रेनों का स्टॉपेज है। आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर रानी कमलापति कौन थीं, जिनके नाम पर स्टेशन का नाम रखा जा रहा है। इसे लेकर Asianet News Hindi ने भोपाल गैस कांड पर "आधी रात का सच" किताब लिखने वाले और वर्तमान में मध्य प्रदेश के सूचना आयुक्त विजय मनोहर तिवारी से बात की। उनसे जाना कि आखिर हबीबगंज रेलवे स्टेशन का इतिहास क्या रहा है और रानी कमलापति कौन थीं? 

दोस्त खान का दिल्ली से पलायन करना 
विजय मनोहर तिवारी (Vijay Manohar Tiwari) बताते हैं कि 50 साल तक शासन करने के बाद जब औरंगजेब की मौत हुई, तब भारी राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल बना। उस वक्त दोस्त मोहम्मद खान नाम का एक अफगान व्यक्ति था, जो दिल्ली में औरंगजेब के यहां काम करता था। औरंगजेब की मौत के बाद कई लोगों ने दिल्ली से पलायन किया। इधर-उधर गए। दोस्त मोहम्मद खान भी पलायन करके भोपाल के पास बैरसिया नाम की जगह पर आया। वो जगह थी मंगलगढ़। मंगलगढ़ एक छोटी सी राजपूत रियासत थी, जहां पर उसने नौकरी की। 

कमलापति चाहती थीं पति की हत्या का बदला
दोस्त खान की अपनी इच्छा थी वह खुद की ताकत को फैलाए। इसलिए उसने अपनी एक छोटी से आर्मी बनाई। आर्मी बनाने के बाद भोपाल की तरफ सक्रिय हुआ। उस वक्त भोपाल इस रूप में नहीं था। वह जगदीशपुर नाम की जगह है, जिसे बाद में बदलकर इस्लामनगर रखा गया। वो गोंड रियासत थी। गोंड की देश में तीन ब्रांच रही है। उन्होंने ढाई सौ से लेकर पांच सौ सालों तक राज किया है। रानी कमलापति तत्काल भोपाल रियासत थी। ये पूरा उनका ही क्षेत्र था। उनके परिवार के साथ एक हादसा हुआ था। उनके पति की हत्या परिवार के ही व्यक्ति ने कर दी थी। 

भोपाल के छोटे तालाब में आत्महत्या कर ली
अब रानी कमलापति को अपने पति की मौत का बदला लेना था। इसके लिए उन्होंने दोस्त मोहम्मद खान से एक समझौता किया, जिसमें कहा गया कि दोस्त मोहम्मद खान उनके पति के हत्यारे को खत्म करेगा। बदले में एक लाख रुपए लेगा। लेकिन दोस्त मोहम्मद खान की इच्छा कुछ और थी। वह भोपाल पर कब्जा करना चाहता था। उसे लगा कि रानी कमलापति अकेली हैं। विधवा हैं। कमजोर हैं। इस चक्कर में दोस्त मोहम्मद खान का पूरा फोकस भोपाल पर हो गया। इसके बाद वहां पर क्या घटित हुआ है उसका कोई स्पष्ट विवरण नहीं मिलता है। लेकिन कहानी ये है कि रानी कमलापति ने भोपाल के छोटे तालाब में आत्महत्या कर ली। हम कल्पना नहीं कर सकते हैं कि उस वक्त रानी कमलापति के साथ क्या हुआ होगा कि उन्हें मौत को चुनना पड़ा। उनका एक बोटा नवल शाह था। उम्र महज 18 साल थी, लेकिन वह लड़ते हुए मारा गया। 

पूजा सक्सेना अपने एक रिसर्च पेपर में लिखती हैं कि रानी कमलापति ने दोस्त खान से एक लाख रुपए में समझौता किया, जिसके बाद दोस्त खान ने चैनपुर-बारी के गोंड राजा पर हमला किया और उसके क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। लेकिन रानी कमलापति के पास एक लाख रुपए नहीं थे। इसके बजाय उन्होंने आधी राशि का भुगतान किया और भोपाल का एक गांव दे दिया। जिसे अब भोपाल के नाम से जाना जाता है। इसके बाद जब रानी कमलापति की मृत्यु हुई तो दोस्त मोहम्मद ने रानी के गहने और कीमती सामान- महल को अपने कब्जे में ले लिया।  

स्टेशन का नाम "हबीबगंज" कैसे पड़ा? 
विजय मनोहर तिवारी बताते हैं, भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह थे। उनके एक भाई थे नसरुल्लाह। नसरुल्लाह के बड़े बेटे का नाम हबीबुल्लाह था। भोपाल के पास एक गांव था जो  हबीबुल्लाह की जागीर थी। पहले जो राजा, नवाब या सुल्तान हुआ करते थे, वे अपने भाई भतीजों को जागीरें बांटा करते थे। हबीबुल्लाह अंतिम नवाब के भतीजे थे। वे खुद नवाब नहीं थे, लेकिन उनको उस गांव की जागीर मिली हुई थी। 110-112 साल पहले जब यहां ट्रेन रूट का काम शुरू हुआ तो हर 10-12 किमी पर एक रेलवे स्टेशन प्लान किया गया। जब यहां का रेलवे स्टेशन प्लान हुआ तो एक नाम रखना था। तो लोगों ने कहा कि हबीबुल्लाह की जागीर है तो उन्हीं के नाम पर ये नाम रख दिया गया और इस तरह से इस स्टेशन का नाम हबीबगंज रेलवे स्टेशन पड़ गया।

भारत का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन
हबीबगंज रेलवे स्टेशन का निर्माण 1979 में किया गया। रेलवे मिनिस्ट्री ने साल 2017 में हबीबगंज रेलवे स्टेशन का निजीकरण किया। ये भारत का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन बन गया। स्टेशन में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, फॉरेक्स कियोस्क और खाने की व्यवस्था है। बंसल ग्रुप (मैसर्स बंसल पाथवेज हबीबगंज प्राइवेट लिमिटेड)  (Bansal Group (M/S Bansal Pathways Habibganj Private Limited) ने आईआरएसडीसी से इस रेलवे स्टेशन को रेनोवेट करने की जिम्मेदारी ली है।

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