बेंगलुरु में एक ग्राहक को उपभोक्ता फोरम कोर्ट (Consumer Forum Court) ने झटका देते हुए उसे राहत देने की जगह जुर्माना लगा दिया। उपभोक्ता से होटल वाले ने 40 पैसे ज्यादा ले लिए थे। यही वसूलने के लिए ग्राहक ने कोर्ट का रुख किया था, मगर जज ने इसे कोर्ट के समय की बर्बादी माना और उपभोक्ता पर उल्टे जुर्माना लगा दिया। 

नई दिल्ली। दुकान, होटल, रेस्त्रां या कहीं और भी जब हम कोई सामान खरीदते हैं या किसी तरीके की सर्विस लेते हैं और बदले में हम भुगतान करते हैं, तो बिल पेमेंट के समय सामने वाला कुछ पैसे वापस नहीं देता या फिर राउंड फीगर करने में थोड़ा ज्यादा पैसे ले लेता है। यानी बिल अगर कुछ पैसे में है तो उसमें कुछ और पैसे जोड़कर रुपए में तब्दील कर दिया जाता है। इस तरह हम और आप सामने वाले को अतिरिक्त भुगतान कर देते हैं। 

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बेंगलुरु में एक ग्राहक को उपभोक्ता फोरम कोर्ट ने झटका देते हुए उसे राहत देने की जगह जुर्माना लगा दिया। उपभोक्ता से होटल वाले ने 40 पैसे ज्यादा ले लिए थे। यही वसूलने के लिए ग्राहक ने कोर्ट का रुख किया था, मगर जज ने इसे कोर्ट के समय की बर्बादी माना और उपभोक्ता पर उल्टे जुर्माना लगा दिया। इसमें दो हजार रुपए ग्राहक को बतौर जुर्माना देना होगा और दो हजार रुपए होटल प्रबंधन को। इसके लिए ग्राहक को 30 दिन का समय दिया गया है। 

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ज्यादा पैसे की अनदेखी

अक्सर सामने को बिल पेमेंट करते समय लिए गए ज्यादा पैसे की हम अनदेखी कर देते हैं, मगर या कौन झंझट पाले यह सोचकर कुछ पैसे छोड़ देते हैं, मगर बेंगलुरु में होटल ने एक वकील से 40 पैसे ज्यादा लिए तो वकील ने होटल प्रबंधन को कोर्ट में घसीट लिया। अब कोर्ट ने 9 महीने बाद होटल प्रबंधन को उपभोक्ता को 4 हजार रुपए भुगतान करने को कहा है। 

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उपभोक्ता फोरम कोर्ट में केस फाइल हुआ

बेंगलुरु के उपभोक्ता फोरम कोर्ट में केस फाइल हुआ था, जिसमें उपभोक्ता ने बिल राउंड ऑफ करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। उपभोक्ता बेंगलुरु के टी. नरसिम्हा मूर्ति मार्च 2021 में एक होटल में गए थे। यहां खाने का बिल 264.60 रुपए था। होटल ने राउंड ऑफ में उनसे 265 रुपए ले लिए। नरसिम्हा मूर्ति पेशे से वकील हैं। उन्होंने इसे गलत प्रैक्टिस मानते हुए मामले को उपभोक्ता फोरम में ले गए। 

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होटल पर लगाया लूटने का आरोप 
यह मामला पिछले साल यानी मई 2021 का है। टी. नरसिम्हा मूर्ति नाम के बुजुर्ग ने होटल एम्पायर से खाना लिया। बदले में स्टाफ ने उन्हें 265 रुपए का बिल दिया, जबकि पूरा बिल 264.40 रुप का था। मूर्ति ने इसके बारे में स्टाफ से पूछा, मगर जवाब नहीं मिला, तो वह बेंगलुरु उपभोक्ता फोरम कोर्ट पहुंचे और रेस्त्रां पर लूटने का आरोप लगाकर केस फाइल किया। बुजुर्ग ने कहा, इस घटना ने उन्हें परेशान किया है। जून 2021 में उन्होंने कोर्ट में केस फाइल किया और खुद ही पैरवी भी की। वहीं, होटल की ओर से अंशुमान एम. और आदित्य एंब्रोस ने पैरवी की। उन्होंने दलील दी कि ऐसा करने के लिए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट-2017 की धारा 170 के तहत उन्हें अनुमति मिली हुई है। 

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समय बर्बाद करने के लिए फटकार लगाई 
यह केस करीब 8 महीने तक चला। केस की सुनवाई कर रहे जज ने बताया कि नियमानुसार 50 पैसे से कम बिल केस को अनदेखा किया जाता है। व्यावसायिक प्रतिष्ठान 50 पैसे से अधिक बिल होने पर एक रुपए ले सकते हैं। कोर्ट के समय की बर्बादी को देखते हुए जज ने बुजुर्ग को फटकार लगाई। इसके अलावा, दो हजार रुपए रेस्त्रां को दो हजार रुपए कोर्ट बतौर जुर्माना देने का आदेश भी दिया।