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15 अगस्त को ही आजादी का दिन क्यों चुना गया, जानिए क्या थी वजह

Independence Day 2022: लॉर्ड माउंटबेटन ने तय कर लिया था कि संयुक्त भारत की आजादी का दिन 15 अगस्त 1947  को होगा, मगर ज्योतिषियों ने इसका विरोध कर दिया और इसे टालने की गुजारिश की। बाद में इसे बदलकर 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि कर दिया गया।

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New Delhi, First Published Aug 14, 2022, 8:19 AM IST

ट्रेडिंग डेस्क। Independence Day 2022: स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने के अवसर पर देशभर में इस साल आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। 15 अगस्त 1947 को ही संयुक्त भारत के दो टुकड़े कर अंग्रेजों ने आजादी दे दी थी। एक हिस्सा बना भारत तो दूसरा हिस्सा बना पाकिस्तान। यह अलग बात है कि पाकिस्तान एक दिन पहले 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। हालांकि, अंग्रेजों से 15 अगस्त को ही आजादी क्यों मिली और भारत 15 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाता है, इसकी वजह भी बड़ी दिलचस्प है। 

दरअसल, 1930 से 1947 तक हर साल भारत 26 जनवरी को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता था। इसका फैसला 1929 में लाहौर में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में लिया गया था। इस अधिवेशन में ही भारत ने पूर्ण स्वराज का ऐलान कर दिया था। इस ऐलान के बाद सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारतीय नागरिकों से निवेदन किया गया। इसके अलावा, भारत की पूर्ण स्वतंत्रता तक आदेशों का पालन समय से करने को भी कहा गया। 

माउंटबेटन चाहते थे 15 अगस्त को आजादी दी जाए, ज्योतिष इसका विरोध कर रहे थे 
तब भारत में लॉर्ड माउंटबेटन का शासन था। उन्होंने ही भारत की स्वतंत्रता के लिए 15 अगस्त का दिन  तय करके रखा गया था। यह दिन उनके लिए खास था। यही नहीं, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 15 अगस्त 1945 को जापान की सेना ने ब्रिटेन के सामने उनके नेतृत्व में आत्मसमर्पण कर दिया था। माउंटबेटन ने 3 जून के प्लान में जब आजादी का दिन तय किया, तब देशभर में ज्योतिष नाराज हो गए। दरअसल, ज्योतिषों का मानना था कि 15 अगस्त 1947 को का दिन अशुभ है और इसके परिणाम मंगलकारी नहीं होंगे। इसके बाद दूसरी तारीखें भी बताई गईं, मगर माउंटबेटन नहीं माने। इसके बाद ज्योतिषों ने कहा कि इसे 14 और 15 अगस्त की मध्य रात्रि कर दिया जाए। ज्योतिष ये भी चाहते थे कि सत्ता के परिवर्तन का भाषण 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक दिया। यह 24 मिनट का था। 

नेहरू और जिन्ना का झगड़ा लगातार बढ़ता जा रहा था 
पहले ये भाषण 12 बजकर 39 मिनट तक दिया जाना था। इस समय सीमा के ही जवाहरलाल नेहरू को भाषण देना था। बता दें कि पहले ब्रिटेन भारत को जून 1948 तक सत्ता देना चाहता था, मगर फरवरी 1947 में सत्ता मिलते ही माउंटबेटन ने भारतीय नेताओं से आम सहमति बनानी शुरू कर दी। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से बातचीत भी हुई। मगर स्थितियां बदलती गईं, क्योंकि नेहरू और जिन्ना के बीच झगड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा था। जिन्ना ने पाकिस्तान निर्माण की मांग को लेकर देशभर में दंगे कराने शुरू कर दिए। माउंटबेटन इन सबसे परेशान हो गए और उन्होंने तय कर लिया कि आजादी का दिन एक साल पहले 1947 को कर देंगे। 

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