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10 सितंबर को भादौ मास का अंतिम दिन, ये 4 काम बढ़ा सकते हैं आपके परिवार की खुशियां

Bhadrapada Purnima 2022: पंचांग के अनुसार, हर महीने की अंतिम दिन पूर्णिमा होती है। इस तिथि का धर्म ग्रंथों में विशेष महत्व बताया गया है। इस तिथि पर कई प्रमुख त्योहार भी मनाए जाते हैं जैसे हनुमान जन्मोत्सव, रक्षाबंधन, शरद पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा आदि।  
 

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First Published Sep 9, 2022, 10:51 AM IST

उज्जैन. इस बार 10 सितंबर, शनिवार को भाद्रपद मास की पूर्णिमा (Bhadrapada Purnima 2022) है। ये भाद्रपद मास का अंतिम दिन है। इसके अगले दिन से यानी 11 सितंबर, रविवार को आश्विन मास आरंभ हो जाएगा। भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इसी दिन से 16 दिवसीय श्राद्ध पक्ष की शुरूआत होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। आगे जानिए इस तिथि का महत्व व अन्य खास बातें…

इस दिन करें पीपल की पूजा
पूर्णिमा तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। पीपल में भगवान विष्णु का वास माना गया है। इसलिए पूर्णिमा तिथि पर पीपल की पूजा करने से भी शुभ फल मिल सकते हैं और सुख-समृद्धि भी बढ़ती है। पीपल पर चढ़ चढ़ाने के बाद शुद्ध घी का दीपक लगाएं और पेड़ की 7 परिक्रमा कर परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। 

तुलसी को चढ़ाएं जल
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है। इसके बिना विष्णुजी की पूजा अधूरी मानी जाती है। पूर्णिमा तिथि पर तुलसी को जल चढ़ाएं और तुलसी नामाष्टक मंत्र बोलते हुए 7 परिक्रमा करें। ऐसा करने से आपकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है। भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध पक्ष का पहला दिन होता है। इस दिन पितरों का तर्पण करते समय तुलसी का उपयोग भी करना चाहिए। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं। 

सत्यनारायण भगवान की कथा करवाएं
धर्म ग्रंथों में भगवान सत्यनारायण की कथा का विशेष महत्व बताया गया है। ये कथा अगर पूर्णिमा तिथि पर करवाई जाए तो और भी शुभ फल मिलते हैं। भाद्रपद पूर्णिमा तिथि इसके लिए बहुत ही शुभ मानी गई है। सत्यनारायण भगवान की कथा में देवी लक्ष्मी की पूजा भी सम्मिलित रूप से हो जाती है। इससे हर तरह के शुभ फल हमें प्राप्त होते हैं। 

दान का विशेष महत्व
भाद्रपद मास की पूर्णिमा पर दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, कच्चा अनाज, कपड़े आदि चीजों का दान करना चाहिए। इससे पितृ देवता प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। इसलिए भाद्रपद पूर्णिमा पर दान करना बहुत ही शुभ माना गया है। 


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