उज्जैन. अनंत चतुर्दशी के दिन 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होता है और घरों में स्थापित भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इसकी विधि इस प्रकार है-

इस विधि से करें गणेश प्रतिमा का विसर्जन

  • विसर्जन से पहले स्थापित गणेश प्रतिमा का संकल्प मंत्र के बाद षोड़शोपचार पूजन-आरती करें। गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं।
  • मंत्र बोलते हुए 21 दूर्वा दल चढ़ाएं। 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास रख दें और 5 ब्राह्मण को दान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद के रूप में बांट दें।
  • पूजन के समय यह मंत्र बोलें- ऊँ गं गणपतये नम:
  • गणेशजी को दूर्वा अर्पित करते समय नीचे लिखे मंत्रों का जाप करें-

ऊँ गणाधिपतयै नम:
ऊँ उमापुत्राय नम:
ऊँ विघ्ननाशनाय नम:
ऊँ विनायकाय नम:
ऊँ ईशपुत्राय नम:
ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:
ऊँ एकदन्ताय नम:
ऊँ इभवक्त्राय नम:
ऊँ मूषकवाहनाय नम:
ऊँ कुमारगुरवे नम:

  • इसके बाद भगवान श्रीगणेश की आरती उतारें, प्रतिमा का विसर्जन कर दें और यह मंत्र बोलें-

यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्।
इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च॥


गणेश प्रतिमा विसर्जन के शुभ मुहूर्त

  • सुबह 06:10 से 07:50 तक
  • सुबह 10:50 से दोपहर 03:22 तक
  • शाम  04:55 से 06:25 तक