इस बार मलमास 14 मार्च से शुरू हो चुका है, जो 14 अप्रैल तक रहेगा। धर्म ग्रंथों में इस समय का विशेष महत्व बताया गया है।

उज्जैन. मलमास में भगवान विष्णु और सूर्यदेव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। ज्योतिष के अनुसार, मल मास में सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदल सकता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्‌ट के अनुसार, मल मास में किए जाने वाले कुछ विशेष उपाय इस प्रकार हैं-

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1. जिन लोगों की कुंडली में सूर्य नीच की स्थिति में हो वे यदि मल मास के दौरान सूर्य यंत्र की स्थापना कर पूजा करें तो इससे कुंडली के दोष कम होते हैं और विशेष लाभ भी मिलता है।
2. मल मास में रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कामों से निपट कर सूर्य को अर्घ्य दें। अब पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जाप करें।

मंत्र- ऊं आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्

3. ज्योतिष के अनुसार, तांबा सूर्य की धातु है। मल मास में तांबे का सिक्का या तांबे का चौकोर टुकड़ा बहते जल में प्रवाहित करने से कुंडली में स्थित सूर्य दोष कम होता है।

4. मलमास में लाल कपड़े में गेहूं व गुड़ बांधकर किसी जरूरतमंद को दान देने से भी व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो सकती है।