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12 दिसंबर को शुभ योग में इस विधि से करें शनिदेव की पूजा, दूर होगी हर परेशानी

इस बार 12 दिसंबर, शनिवार को शनि प्रदोष का योग बन रहा है। इस दिन शनिदेव की पूजा का विशेष फल मिलता है।

On 12 December, worship Lord Shani with this method in auspicious yoga, all problems will be overcome KPI
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Ujjain, First Published Dec 11, 2020, 11:13 AM IST
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उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनि न्यायाधीश हैं, शनि के अशुभ असर से बचने के लिए शनि के दस नाम वाले मंत्र का जाप करना चाहिए। ये मंत्र जाप शनि प्रदोष पर करने से शुभ फल मिल सकते हैं। ये है शनि के दस नामों का मंत्र-

कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।

इस मंत्र के अनुसार कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद और पिप्पलाद। इन दस नामों से शनिदेव का स्मरण करने से सभी शनि दोष दूर हो जाते हैं।

पहले ऐसे करें शनिदेव की पूजा

- शनि प्रदोष की सुबह स्नान आदि करने के बाद शनि मंदिर जाएं और शनि प्रतिमा का अभिषेक सरसों के तेल से करें।
- तेल में काले तिल और साबूत काली उड़द भी डालें। शनि को शमी के पत्ते विशेष प्रिय हैं। इसीलिए ये पत्ते जरूर चढ़ाएं।
- शनि को अपराजिता के फूल चढ़ाएं। ये फूल नीले होते हैं। शनि नीले वस्त्र धारण करते हैं और उन्हें नीला रंग प्रिय है। इसी वजह से शनि को ये फूल चढ़ाते हैं।
- इसके बाद किसी एकांत स्थान पर बैठकर शनि के 10 नामों वाले मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।
- मंत्र जाप के बाद पीपल के पेड़ पर जल भी चढ़ाएं और हनुमानजी के दर्शन करें। ऐसा करने से आपकी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

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