11 मई, सोमवार से शनि ग्रह मकर राशि में वक्री हो चुका है। शनि के वक्री होने से कुछ लोगों के लिए परेशानियां बढ़ सकती हैं।

उज्जैन. जिन राशियों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती और ढय्या का प्रभाव है, उन राशि के लोगों को इस समय थोड़ा संभलकर रहना होगा।

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इन राशियों पर है शनि की टेढ़ी नजर
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, इस समय धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव हैं, वहीं मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढय्या का असर है। इन राशि वाले लोगों को शनि के अशुभ असर से बचने के लिए शनि के मंत्र का जाप करना चाहिए।

इस विधि से करें पूजा और मंत्र जाप
- पं. शर्मा के अनुसार प्रत्येक शनिवार को शनिदेव के समक्ष लोहे का या मिट्टी का दीपक जलाएं, लोहे के बर्तन में भरकर शनि को तेल चढ़ाएं। काले तिल और काली उड़द भी चढ़ाएं। साथ ही ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें।
- ध्यान रखें पूजा में लाल कपड़े, लाल फल या लाल फूल शनिदेव को नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि लाल रंग की ये चीजें मंगल ग्रह से संबंधित हैं। ये ग्रह भी शनि का शत्रु है।
- शनिदेव की पूजा में काले या नीले रंग की चीजों का उपयोग करना शुभ रहता है। शनि को नीले फूल चढ़ाना चाहिए। शनि को पश्चिम दिशा का स्वामी माना गया है, इस वजह से इनकी पूजा करते समय या शनि मंत्रों का जाप करते समय भक्त का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
- पूजा करने वाले व्यक्ति को अस्वच्छ अवस्था में शनि की पूजा नहीं करनी चाहिए। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। शनिवार को क्षौर कर्म न करें यानी बाल और नाखून न काटें।