कांग्रेस से बागी होकर बीजेपी में शामिल हुई अदिति सिंह के लिए यह फैसला फायदेमंद होता दिखाई नहीं पड़ रहा है। कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। हालांकि शपथग्रहण के बाद इन कायसों पर भी पानी फिर गया।

लखनऊ: कांग्रेस से बागी होकर बीजेपी में आई अदिति सिंह के लिए यह कदम फायदे का सौदा साबित होता नहीं दिखाई पड़ रहा है। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की वजह से कहीं न कहीं उनके पिता के बनाए गए वोटबैंक पर भी सेंध लगती दिखाई पड़ी। यही कारण है कि इस बार के चुनाव में उनके जीत के अंतर में भी बदलाव दिखा पड़ा। यही नहीं जो कयास लगाए जा रहे थे वह भी सच साबित न हुए। 

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2017 में 90 हजार था वोट का अंतर
अदिति सिंह ने जब 2017 में राजनीति में कदम रखा तो वह कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ी। उस दौरान अदिति सिंह ने तकरीबन 90 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीता था। हालांकि इस बार अदिति सिंह भले ही चुनाव जीत गई हों लेकिन वोटों का अंतर महज सात हजार ही रह गया। 

मंत्रिमंडल में भी नहीं मिली जगह 
अदिति सिंह के भाजपा में शामिल होने के साथ और चुनाव के दौरान भी यह माना जा रहा था कि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। जब मंत्रिमंडल में महिला चेहरों की बात होती थी तो उसमें अदिति सिंह का नाम लिस्ट में ऊपर के चंद लोगों में आता था। हालांकि शपथग्रहण के दौरान इन कयासों पर पानी फिर गया। अदिति सिंह को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। 

दिनेश प्रताप सिंह को मिली जगह 
अदिति सिंह की जगह भाजपा ने दिनेश प्रताप सिंह पर भरोसा जताया है। दिनेश को योगी सरकार 2.0 में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। माना जा रहा है कि इसके पीछे का कारण 2024 का लोकसभा चुनाव है। दरअसल पार्टी रायबरेली में दिनेश का कद बढ़ाना चाहती है। यही वजह है कि उन्हें यह पद दिया गया है। दिनेश इससे पहले साल 2010 औऱ 2016 में एमएलसी चुने गए थे और उनके भाई राकेश सिंह हरचंदपुर से 2017 में विधायक भी बने थे। 

इन 5 महिला विधायकों ने ली मंत्रीपद की शपथ 
योगी सरकार 2.0 में मंत्री पद के लिए अपर्णा यादव और अदिति सिंह का नाम शुरुआत से चर्चाओं में चल रहा था। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। शपथग्रहण के दौरान बेबी रानी मौर्य ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। इसी के साथ प्रतिभा शुक्ला, गुलाब देवी, रजनी तिवारी और विजय लक्ष्मी गौतम ने भी राज्यमंत्री की शपथ ली। 

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