यूपी के शामली में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान दोनों ही नेता बजट को लेकर हमलावर दिखे। इसी के साथ प्रत्याशियों के लिए वहां पर वोट अपील की गयी। अखिलेश ने वादा किया कि सरकार आने पर कानून व्यवस्था को और भी मजबूत किया जाएगा। 

शामली: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने शामली में संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। अखिलेश यादव ने चौधरी चरण सिंह का जिक्र करते हुए यह वह इलाका है जहां किसान जागरुक और समझदार है। यहां चुनाव भाईचारा बनाम भारतीय जनता पार्टी का होने जा रहा है। आज हर वर्ग नकारात्मक सोच हटाना चाहता है। यूपी में इतना तिरस्कार किसी का नहीं हुआ जितना भाजपा के नेताओं का हो रहा है। जनता अक्रोशित होकर भाजपा के नेताओं और विधायक का तिरस्कार कर रही है। 

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अखिलेश ने कहा कि मैं अपने कर्मचारी और कर्मचारी संगठन के लोगों को विश्वास दिलाता हूं पुरानी पेंशन बहाल होगी। यूपी की मौजूदा सरकार किसानों को खाद नहीं दे पाई लेकिन हमारी सरकार आने पर इन सभी चीजों का ध्यान रखा जाएगा। घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी, जबकि किसानों को सिंचाई के लिए बिजली का लाभ मिलेगा। बिजली उत्पादन बढ़ाने की जगह भाजपा ने केवल बिजली के बिल बढ़ाने का काम किया है। हम उम्मीद के साथ गठबंधन के जरिए जनता के सामने आए हैं। 

कानून व्यवस्था को लेकर किया वादा 
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार आने पर यूपी पुलिस की गाड़ियां और फोर्स को बढ़ाया जाएगा। पहले जो रिस्पांस सिस्टम 15 मिनट था वह सरकार आने पर और भी कम किया जाएगा। 

'शब्दों से खिलवाड़ कर लोगों को भटकाया जा रहा'
अखिलेश यादव ने कहा कि कल जो बजट आया है उसे अमृत काल का बजट बताया जा रहा है। क्या जो बजट इससे पहले की सरकारों में आए वह जहर के बजट थे। शब्दों के खिलवाड़ से यह लोग लोगों को भटकाने का काम कर रहे हैं। हीरे और चप्पल जूते सस्ते किए हैं। इससे गरीब को क्या लाभ होगा। 

बजट को लेकर हमलावर हुए जयंत 
जयंत चौधरी ने कहा कि कल के बजट में किसानों और रोजगार के लिए कुछ भी नहीं है। इस साल के बजट में कोई ऐसी चीज नहीं है जिससे नौजवानों को रोजगार की कोई सुविधा मिल सके। यह संकेत है कि सरकार चाहे केंद्र की हो या यूपी की लेकिन किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।

गरमी खत्म हो गई तो जिंदा कैसे रहेंगे 
अखिलेश यादव में सीएम योगी आदित्यनाथ के गरमी शांत करने वाले बयान को लेकर कहा कि ऐसे बयानों का संज्ञान चुनाव आयोग को लेना चाहिए। मुख्यमंत्री की यह भाषा नहीं हो सकती है। जिंदा रहने के लिए शरीर में गरमी रहना बहुत जरूरी है। अगर गरमी खत्म हो जाएगी तो आदमी जिंदा ही नहीं रहेगा।