मैनपुरी और रामपुर उपचुनाव को लेकर बीजेपी ने खास रणनीति बनाई है। मैनपुरी में विरासत को बचाने के लिए अखिलेश यादव खुद उपचुनाव की कमान संभालेंगे। वहीं रामपुर से आजम खां के परिवार के ही सदस्य को चुनाव में उतारा जाएगा।

लखनऊ: गोला गोकर्णनाथ उपचुनाव में सपा को मिली करारी हार के बाद राजनीतिक गढ़ बचाने की बड़ी चुनौती पार्टी के सामने है। मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी उपचुनाव में बीजेपी जीत के लिए पुरजोर प्रयास करेगी। दरअसल 1996 से इस सीट पर सपा ही जीतती आई है। ऐसे में नेताजी के निधन के बाद बीजेपी का प्रयास होगा कि उपचुनाव में ही इस सीट पर जीत दर्ज कर सपा को बड़ा झटका दिया जाए। इसी के साथ रामपुर में भी बीजेपी जीत दर्ज करने के लिए पूरी रणनीति बना रहा है। हालांकि बीजेपी के मिशन को नाकामयाब कर सपा अपना गढ़ बचाने की पुरजोर कोशिश में लगी हुई है। 

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मैनपुरी में होगी विरासत बचाने की जंग
अखिलेश यादव मैनपुरी उपचुनाव में मुलायम सिंह यादव की यादों के सहारे पिता की विरासत बचाने की जंग की लड़ते नजर आएंगे। इस सियासी जंग में सत्ताधारी पार्टी से उनका सीधा मुकाबला होगा। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव खुद ही इस सीट की कमान संभालेंगे और चुनाव प्रचार करेंगे। इसी के साथ यहां परिवार के ही किसी सदस्य को चुनावी मैदान में भी उतारा जाएगा। 

रामपुर में आजम के परिवार पर होगा प्रचार का जिम्मा
वहीं रामपुर में उपचुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी आजम खां के ही परिवार के किसी सदस्य को टिकट दे सकती है। सूत्रों के अनुसार रामपुर विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उम्मीदवार पहले ही तय कर लिया है। रामपुर सीट पर पार्टी आजम खां की पत्नी तंजीन फातिमा को उम्मीदवार बना सकती है। पार्टी यहां सहानुभूति के सहारे ही चुनाव जीतने की सोच रही है। वहीं रामपुर में उपचुनाव में जीत के लिए प्रचार की जिम्मेदारी आजम खां के परिवार की ही होगी। रिपोर्टस बताती हैं कि पार्टी की ओर से जल्द ही तंजीन फातिमा के नाम का ऐलान कर सकती है। मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार तय कर चुकी है।

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