यूपी के खस्ता हाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की सामने आने वाली तस्वीरें मन को झझकोर देने वाली हैं। कई बार मरीजों को उचित इलाज न मिलने और स्टाफ की गैर-जिम्मेदाराना हरकत के चलते खामियाजा उठाना पड़ता है। इस मामले की दो वीडियो वायरल हो रही हैं। 

बागपत: उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खस्ता हाल तस्वीरें अक्सर सामने आया करती हैं। यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक जहां एक ओर लगातार दौरा कर स्वास्थ्य विभाग की कमियों और फैली अव्यवस्थाओं को दूर करने के निर्देश देते हुए नजर आते हैं तो वहीं दूसरी ओर अस्पतालों से झझकोर देने वाली खबरे सामने आया करती हैं। हाल ही में देवरिया और बागपत के दो वीडियो वायरल हो रहे हैं। यह दोनों वीडियो अलग-अलग जिलों की हैं जहां पर मरीज के लिए न तो स्ट्रेचर मिलता है और न एंबुलेंस ही मिलती है। देवरिया जिला अस्पताल में एक युवक को उसकी बुजुर्ग मां के इलाज के लिए स्ट्रेचर नहीं मिल पाता है। 

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खस्ता हाल निकली स्वास्थ्य व्यवस्थाएं
युवक चीख-चीखकर अस्पताल के स्टॉफ से स्ट्रेचर की मांग करता है। युवक अपनी मां की हालत गंभीर बता रहा है। दो स्ट्रेचर खाली होने के बाद भी युवक को स्ट्रेचर नहीं दिया जाता है। जिस कारण युवक अपनी मां को कंधे पर उठाकर इधर-उधर इलाज के लिए भागता-दौड़ता नजर आता है। लेकिन उसकी मां को इलाज न मिलने के कारण थोड़ी देर बाद उनकी मौत हो जाती है। मानवता को शर्मसार करने वाला यह वीडियो देवरिया के जिला अस्पताल का है। वीडियो में साफतौर पर देखा जा सकता है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते एक बेटे ने अपनी मां को खो दिया।

अस्पताल का वीडियो हो रहा वायरल
वहीं दूसरी वीडियो बागपत जिले की है। जहां पर पोस्टमार्टम कर दो साल बेटे का शव पिता को सौंप दिया जाता है। जिसके बाद पिता काफी देर तक बेटे के शव को हाथ में लिए एंबुलेंस की तलाश में इधर-उधर भटकता रहता है। एंबुलेंस देने की बात पर कोई सुनवाई नहीं की जाती है। बागपत में एक महिला ने दो साल के मासूम को चलती कार के नीचे फेंक दिया था। तेज रफ्तार कार बच्चे के ऊपर से गुजर गई। जिससे बच्चे की मौत हो गई। राजस्थान से अपने बच्चे का शव लेने आया पिता एंबुलेंस न मिलने पर अपने बेटे के शव को हाथ में लेकर पैदल ही जाने लगा। थोड़ी देर बाद जब पिता थक गया तो उसने बड़े बेटे के हाथ में शव दे दिया।

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सीएमओ ने दी मामले पर सफाई
मृतक के पिता ने आरोप लगाते हुए कहा कि बेटे की मौत की खबर सुनकर मैं राजस्थान से आया था। मेरे पास ज्यादा रुपए भी नहीं थे। वहीं निजी वाहन 1000 रुपए ज्यादा मांग रहे थे। अस्पताल द्वारा एक घंटे बाद एंबुलेंस दी गई थी। इस पूरे मामले पर सीएमओ दिनेश शर्मा ने कहा कि परिवार से कुछ समय इंतजार करने के लिए कहा गया था। जिसके बाद कुछ देरी होने पर परिवार शव को लेकर बाहर आ गया। प्रशासन को जब इस बात की जानकारी हुई तो वाहन का इंतजाम कर दिया गया था।

युवक के आरोप को बताया बे-बुनियाद
वहीं देवरिया अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचके मिश्रा के अनुसार, देवरिया जिला अस्पताल पर युवक द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद है। 20 अगस्त को युवक की बुजुर्ग मां अस्पताल में एडमिट हुई थी। गंभीर हालत देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया था। इसी दौरान परिजन निजी अस्पताल में इलाज के लिए चले गए। जहां पर डॉक्टरों ने उनका इलाज करने से मना कर दिया। इसी बीच युवक की मां की मौत हो गई। बुजुर्ग महिला के शव को ले जाने के लिए शव वाहन की भी व्यवस्था की गई थी। उन्होंने बताया कि मां की मौत से नाराज युवक वीडियो बनाकर बेबुनियाद आरोप लगाने लगा।

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