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चुनावी मैदान में कांग्रेस ने खेल दिया बड़ा खेला,इन महिला प्रत्याशियों के चेहरे से क्या बदल जाएगा चुनावी समीकरण

 कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जो स्ट्रैटजी तैयार की है, उसमें इन 'शीरोज' और 'हीरोज' का रोल अहम है। अब कांग्रेस इनके संघर्ष की कहानियां उत्तर प्रदेश की जनता को सुनाएगी ताकि वोट शेयर को बढ़ाया जा सके। अब देखना यह है कि नतीजों पर इसका असर कितना पड़ता है। 

Congress played a big game in the electoral field what will change the electoral equation with the faces of these women candidates
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Lucknow, First Published Jan 13, 2022, 7:35 PM IST
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लखनऊ: कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव (Vidhansabha chunav) के प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी है। प्रियंका गांधी (Priyanka gandhi) ने कहा कि, 125 प्रत्याशियों में से 40 फीसदी महिलाएं और 40 फीसदी युवा हैं। इस ऐतिहासिक बदलाव के साथ हम राज्य में एक नई राजनीति का प्रारंभ करने जा रहे हैं। जो महिलाएं पहली बार चुनाव लड़ रही हैं, वे संघर्षशील और हिम्मती महिलाएं हैं। कांग्रेस पार्टी उन्हें पूरा सहयोग करेगी। कांग्रेस ने जिन 50 महिलाओं को टिकट दिए हैं। उनमें सबसे ज्यादा दलित समुदाय की हैं। इनका प्रतिशत 36% हैं। इसके बाद पिछड़ी जाति और ब्राह्मण जाति से आने वाली महिलाओं को टिकट दिए गए हैं। इसका प्रतिशत 20-20% हैं। इसके अलावा, 12% महिला उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय की हैं। जबकि 10% ठाकुर और 2% पंजाबी महिलाएं हैं। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जो स्ट्रैटजी तैयार की है, उसमें इन 'शीरोज' और 'हीरोज' का रोल अहम है। अब कांग्रेस इनके संघर्ष की कहानियां उत्तर प्रदेश की जनता को सुनाएगी ताकि वोट शेयर को बढ़ाया जा सके। अब देखना यह है कि नतीजों पर इसका असर कितना पड़ता है। 

1. आशा सिंह
उन्नाव में अपनी बेटी के बलात्कार के बाद सत्ताधारी भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ आशा सिंह ने लड़ाई लड़ी। उनके पति की हत्या तक कर दी गई। बावजूद इसके वे लड़ती रहीं। अंत में जब बेटी की मौत हो गई तो भी लड़ाई जारी रखी। आज पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर जेल में है। कांग्रेस ने आशा सिंह को भी टिकट दिया है।

2. ऋतु सिंह
ब्लॉक प्रमुख चुनावों में भाजपा की हिंसा की शिकार का प्रतीक बनी ऋतु सिंह को चुनाव लड़ने से रोका गया, उनके कपड़े फाड़े गए। लखीमपुर खीरी के पसगवां ब्लॉक में ब्लॉक प्रमुख पद के नामांकन के दौरान प्रत्याशी ऋतु सिंह की साड़ी खींची गई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस मामले में जिस आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, उसके भाजपा के साथ कनेक्शन की बात सामने आते ही हंगामा खड़ा हो गया था। युवक भाजपा की सांसद रेखा वर्मा का रिश्तेदार है। रेखा वर्मा UP की धौरहरा सीट से BJP सांसद हैं।

3. पूनम पांडेय
आशा कार्यकर्ता कोरोना के समय उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की जान थीं। उन्होंने अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना लगकर अपनी ड्यूटी दी। आशा कार्यकर्ताओं ने शाहजहांपुर में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा में पहुंची तो उन्हें योगी से मुलाकात करने से रोका गया। जब आशाओं ने जिद की तो उनमें से इनकी अगुआई कर रही पूनम पांडे को पुलिस ने जमकर पीटा। उनका यह वीडियो वायरल हो गया। फिर क्या था, कांग्रेस महासचिव उनसे मिलने पहुंचीं। पूनम पांडेय को कांग्रेस ने न्याय की आवाज करार दिया। अब उन्हें टिकट दिया गया है।

4. सदफ जफर
नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता सदफ पर झूठे मुकदमे लगाए गए। प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिस ने नहीं, बल्कि पुरुष पुलिस ने उन्हें पीटा। उनके बच्चों से अलग करके उनको जेल में डाला गया। सदफ सच्चाई के साथ डटी रहीं। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने हिंसा फैलाई। उनके पास पांच ईंट थीं। वे पत्थरबाजी को उकसा रही थीं। उन्हें 19 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उनका आरोप है कि पुलिस वालों ने उन्हें रातभर पीटा और उन्हें पाकिस्तानी कहा गया।

5. अल्पना निषाद
बसवार, प्रयागराज में बड़े खनन माफियाओं के खिलाफ अल्पना ने मोर्चा खोल दिया। दरअसल माफिया निषादों के संसाधन, यानी नदियों पर अपना हक जमा रहे थे। नदियां निषादों की जीवनरेखा हैं। नदियों और उनके संसाधन पर निषादों का हक होता है। अल्पना माफिया को नदियों से बालू निकालने से रोक रही थीं। भाजपा सरकार की पुलिस ने निषादों को जमकर पीटा। निषादों की नावें जला दी गईं। निषादों की संघर्ष की इस कहानी का चेहरा बनीं अल्पना निषाद। अब उन्हें भी कांग्रेस ने टिकट दिया।

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