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UP के डिप्टी CM ने कहा, हिंसा के पीछे PFI का ही था हाथ, DGP ने बैन करने के लिए गृह विभाग को लिखा पत्र

यूपी में बीते दिनों नागरिकता कानून को लेकर कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन हुए। जांच में हिंसा के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की भूमिका सामने आई। जिसके बाद अब यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने गृह विभाग को पत्र लिख पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है।

dgp op singh request to ban pfi KPU
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Lucknow, First Published Dec 31, 2019, 10:42 AM IST
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लखनऊ (Uttar Pradesh). यूपी में बीते दिनों नागरिकता कानून को लेकर कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन हुए। जांच में हिंसा के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की भूमिका सामने आई। जिसके बाद अब यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने गृह विभाग को पत्र लिख पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। जानकारी के मुताबिक, गृह विभाग इस सिफारिश को केंद्र के पास भेजेगा। वहीं, यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने कहा, सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैलाने में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का ही हाथ था। स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के लोग ही पीएफआई में थे, जिन्होंने यूपी में हिंसा फैलाई। सरकार की तरफ से इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

डीजीपी मुख्यालय की सिफारिश में लिखी गई ये बात
डीजीपी मुख्यालय ने अपनी सिफारिश में लिखा है, पीएफआई में इस्लामिक स्टूडेंट मूवमेंट ऑफ इंडिया यानि सिमी के ज्यादातर सदस्य जुड़ गए हैं। पूरे प्रदेश में गिरफ्तार किए गए लोगों के पास से आपत्तिजनक साहित्य और सामग्री बरामद की गई। पीएफआई के कई सदस्य पकड़े गए जिन पर हिंसा फैलाने का आरोप है।

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लखनऊ हिंसा में 3 पीएफआई सदस्य गिरफ्तार
जानकारी के मुताबिक, लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में पुलिस ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान पीएफआई अध्यक्ष वसीम अहमद, कोषाध्यक्ष नदीम, मंडल अध्यक्ष अशफाक के रूप में हुई थी। साथ ही पुलिस ने इस बात का दावा भी किया था कि लखनऊ में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गुरुवार (19 दिसंबर) को हिंसा का मास्टरमाइंड यही संगठन है।

क्या है पीएफआई
इसका पूरा नाम पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया है। यह चरमपंथी इस्लामी संगठन है। साल 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के मुख्य संगठन के रूप में पीएफआई का गठन किया गया। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। एनडीएफ के अलावा कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी, तमिलनाडु के मनिथा नीति पासराई, गोवा के सिटिजन्स फोरम, राजस्थान के कम्युनिटी सोशल एंड एजुकेशनल सोसाइटी, आंध्र प्रदेश के एसोसिएशन ऑफ सोशल जस्टिस समेत अन्य संगठनों के साथ मिलकर पीएफआई ने कई राज्यों में अपनी पैठ बना ली है। 

पीएफआई खुद को न्याय, आजादी और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले नव-समाज के आंदोलन के रूप में बताता है। इस संगठन की कई अलग-अलग शाखाएं भी हैं। जैसे महिलाओं के लिए - नेशनल वीमेंस फ्रंट और विद्यार्थियों/युवाओं के लिए कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया। इसके गठन के बाद से ही संगठन पर कई समाज विरोधी व देश विरोधी गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं। साल 2012 में केरल सरकार ने एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट से कहा था कि पीएफआई की गतिविधियां देश की सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं।

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