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ये हैं जौनपुर के दिनेश उपाध्याय, जिन्हें 'मन की बात' में PM Modi ने बताया देवदूत, जानिए क्या-क्या हुई बातचीत

दिनेश ने लिक्टिवड ऑक्सिजन का टैंकर चलाते हैं। वह कंपनी आइनॉक्स की ओर से दिए गए आवास में रहते हैं, जबकि उनका परिवार गांव में रहता है। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह बीते 15-17 साल से ऑक्सिजन टैंकर चला रहे हैं।
 

Dinesh Upadhyay of Jaunpur, whom PM Modi told in 'Mann Ki Baat', angel ASA
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Jaunpur, First Published May 30, 2021, 3:32 PM IST
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जौनपुर (Uttar Pradesh)।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मासिक रेडियो कार्यक्रम में 'मन की बात' के 77वें संस्करण में देशवासियों से अपने विचारों को साझा किया। इस दौरान बीते 15-17 साल से मेडिकल ऑक्सीजन का टैंकर चलाने वाले मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र के हसनपुर, जमुआ निवासी दिनेश बाबूलाल उपाध्याय से बात किए। बातचीत के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण से यह लड़ाई हम जीतेंगे क्यों कि दिनेश उपाध्याय जैसे लाखों लोग इस लड़ाई में जुटे हुए हैं। आइये जानते हैं कौन हैं दिनेश उपाध्याय और पीएम से क्या-क्या हुई उनकी बातचीत।

चार भाइयों में दूसरे नंबर पर हैं दिनेश
बता दें कि बाबूलाल उपाध्याय के बेटे दिनेश बाबूलाल उपाध्याय चार भाइयों में दूसरे नंबर के हैं। वह मुम्बई के मानगांव में रहते हैं। उनकी पत्नी निर्मला देवी अपने सास-ससुर और बच्चों के साथ गांव में रहती हैं। उनका पुत्र आर्यन उपाध्याय बीकाम कर रहा है। एक बेटी कक्षा 9 व दूसरी बेटी कक्षा सात की छात्रा है।

15-17 साल से चला रहे ऑक्सिजन टैंकर
दिनेश ने लिक्टिवड ऑक्सिजन का टैंकर चलाते हैं। वह कंपनी आइनॉक्स की ओर से दिए गए आवास में रहते हैं, जबकि उनका परिवार गांव में रहता है। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह बीते 15-17 साल से ऑक्सिजन टैंकर चला रहे हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी का दिनेश उपाध्याय से हुई बातचीत
पीएम नरेंद्र मोदी- दिनेश जी, नमस्कार
दिनेश उपाध्याय - सर जी प्रणाम।
पीएम- सबसे पहले तो मैं चाहता हूं कि आप हमें अपने बारे में कुछ जरूर बताएं।
दिनेश- सर, मेरा नाम दिनेश बाबुलनाथ उपाध्याय है। मैं ग्राम हसनपुर, पोस्ट जमुआ, जिला जौनपुर का रहने वाला हूं।
पीएम - आप यूपी से हो।
दिनेश - हां...हां सर। सर, मेरा एक बेटा है, दो बेटियां हैं। मेरी पत्नी और माता-पिता भी हैं।
पीएम - और क्या करते हो।
दिनेश- सर, मैं लिक्विड ऑक्सीजन के लिए ऑक्सीजन टैंकर चलाता हूं।
पीएम - क्या बच्चों पढ़ाई अच्छी चल रही है।
दिनेश - हां, सर। वो पढ़ रहे है। सर दोनों बेटियां और बेटा पढ़ रहा है।
पीएम- क्या इनकी ऑनलाइन पढ़ाई ठीक चल रही है।
दिनेश - हां, सर, वे अच्छा कर रहे हैं। सर, अभी मेरी बेटियां पढ़ रही हैं, वो भी ऑनलाइन। सर, मैं 15-17 वर्ष से ऑक्सीजन टैंकर चला रहा हूं।
पीएम- ठीक है, आप 15-17 वर्ष से ऑक्सीजन ले जा रहे हैं। तब आप सिर्फ एक ट्रक ड्राइवर नहीं हैं। एक तरह से आप लाखों लोगों की जान बचाने में लगे जीवन रक्षक हैं।
दिनेश - सर, हमारा काम का तरीका ऐसा ही है। सर, ऑक्सीजन टैंकरों की हमारी कंपनी, आइनॉक्स कंपनी भी हमारा अच्छा ख्याल रखती है। जहां भी हम ऑक्सीजन पहुंचाते हैं, वह हमें बहुत खुशी देती है।
पीएम - लेकिन, इस कोरोना काल में आपकी जिम्मेदारियां बहुत बढ़ गई हैं।
दिनेश- हां, सर, बहुत बढ़ गया है।
पीएम- जब आप अपने ट्रक की ड्राइविंग सीट पर होते हैं, तो आपके दिमाग में क्या ख्याल आते हैं। पहले के समय की तुलना में कोई नया अनुभव। बहुत दबाव होना चाहिए। बहुत सारा तनाव। परिवार को लेकर चिंता, कोरोना का माहौल, लोगों का दबाव, मांगें। क्या हो रहा होगा सब।
दिनेश - सर, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हमारे लिए बस इतना है कि हम अपना फर्ज निभा रहे हैं। अगर समय पर ऑक्सीजन पहुंचाने से किसी को जीवन मिलता है तो यह हमारे लिए बड़े सम्मान की बात है।
पीएम - आप बहुत अच्छी तरह से अपनी भावना व्यक्त कर रहे हैं। ठीक है, हमें बताएं आज, इस महामारी के समय में जब लोग आपके काम के महत्व को नोटिस कर रहे हैं, जो शायद उन्हें पहले नहीं पता था। क्या इससे आपके और आपके काम को देखने के तरीके में बदलाव आया है।
दिनेश - हां, सर। पहले हम जैसे ऑक्सीजन ड्राइवर कहीं न कहीं जाम में फंस जाते थे। मौजूदा समय में प्रशासन ने हमारी काफी मदद की है। हम जहां भी जाते हैं, हमारे भीतर एक आंतरिक उत्सुकता महसूस होती है। हम कितनी जल्दी पहुंचकर लोगों की जान बचा सकते हैं। किसी को खाना मिले या न मिले या किसी और समस्या का सामना करना पड़ रहा हो। जब हम टैंकर के साथ अस्पताल पहुंचते हैं, तो हम देखते हैं कि अस्पताल में लोग विक्ट्री चिन्ह के साथ हमारी ओर इशारा कर रहे हैं। यह सब ऐसे लोग होता हैं, जिनके परिवार के सदस्य भर्ती हैं।
पीएम - ठीक है, वे जीत के लिए V का संकेत देते हैं
दिनेश - हां सर। कुछ लोग V दिखाते हैं, अन्य अंगूठा ऊपर उठाते हैं। यह हमें बहुत संतुष्टि देता है। इस तरह की सेवा करने का अवसर पाने के लिए हमने जीवन में एक अच्छा काम किया होगा।
पीएम - आपकी सारी थकान दूर हो रही होगी
दिनेश - हां, सर। थकान दूर हो जाती है, उत्साह वाला काम करने के बाद।
पीएम - तो क्या आप घर आकर अपने बच्चों को इसके बारे में बताते हैं।
दिनेश - नहीं सर। मेरे बच्चे गांव में रहते हैं। मैं यहां आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स में एक ड्राइवर के रूप में हूं। मैं आठ-नौ महीने बाद घर जाता हूं।
पीएम - तो कभी-कभी आप बच्चों से फोन पर बात कर रहे होंगे।
दिनेश - हां सर,। नियमित तौर पर।
पीएम - तब उन्हेंं लग रहा होगा कि इन सबके बीच उनके पिता को अपना ख्याल रखना चाहिए।
दिनेश - जी, सर। सब कहते हैं कि पापा काम करो, लेकिन अपनी सुरक्षा के साथ करो। और हम सुरक्षा के साथ काम करते हैं। मानगांव में भी हमारा प्लांट है। आईनॉक्स हमारी बहुत मदद करता है।
पीएम- ठीक है। दिनेश जी, आपकी बात सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा। और देश को भी पता चलेगा कि लोग कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में कैसे काम कर रहे हैं। नौ महीने से आप अपने बच्चों और परिवार से नहीं मिल रहे हैं, बस यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोगों की जान बच जाए। जब देश इसे सुनेगा, तो उसे गर्व होगा कि हम लड़ाई जीतेंगे, क्योंकि दिनेश उपाध्याय जी जैसे लाखों लोग अडिग हैं, कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
दिनेश - सर, एक न एक दिन हम कोरोना को जरूर हरा देंगे।
पीएम - ठीक दिनेश जी। आपकी भावना ही देश की ताकत है। बहुत धन्यवाद दिनेश जी। और कृपया अपने बच्चों को मेरा आशीर्वाद दें।
दिनेश-  कर लेंगे सर। प्रणाम।
पीएम नरेंद्र मोदी - धन्यवाद।
दिनेश - प्रणाम। 

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