एसटीएफ ने छापेमारी के बाद बिजली चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। यह गिरोह मीटर में छेड़छाड़ कर बिजली चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। गैंग का सरगना अभी फरार है। 

लखनऊ: एसटीएफ ने बीते दिनों 11 दिसंबर को आशियाना स्थित एक आवास पर छापेमारी की। यहां दूसरी मंजिल पर पहुंचते ही टीम को बहुत बड़ा सा मीटर लैब नजर आया। इस मीटर लैब में तकरीबन 578 बिजली के डिजिटल मीटर, 200 से अधिक सिरिंज, 65 रिमोट, 539 चिप बरामद हुए। दरअसल यहां पर स्मार्ट मीटर में चिप लगाने और उसे रिमोट से कनेक्ट करने का काम किया जाता था। 

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छापेमारी के बाद टीम ने मौके से अली, अर्जुन, सोनू, रमन, सतीश को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि इस लैब का मालिक और गैंग का सरगना पवन पाल अभी भी फरार बताया जा रहा है। पड़ताल के बाद पता लगा कि यह बिजली चोरी का कोई पहला मामला नहीं है। बीते पांच सालों में बिजली चोरी के 3 लाख 30 हजार से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। खुद यूपीईआरसी की ओर से यह आंकड़े साझा किए गए हैं। हालांकि सामने आया यह ताजा मामला काफी हैरान करने वाला है। 

एसिड के इस्तेमाल से आसानी से खुल जाता था मीटर
सामने आए हैरान करने वाले मामले के बाद लोग यह सोचने पर विवश हैं कि आखिर डिजिटल मीटर के बावजूद लोग कैसे बिजली की चोरी कर रहे हैं। इसको लेकर एसटीएफ के प्रभारी एसएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि गैंग के लोग विद्युत उपकेंद्र के बाहर से अपने ग्राहकों को तलाशते थे। जो ग्राहक घर में नया मीटर लगवाना चाहता था उसे कम बिजली बिल का लालच देकर अपनी बातों में फंसा लिया जाता था। शहर के कई इलेक्ट्रीशियन भी इन लोगों को ग्राहक दिलवाते थे। वहीं ग्राहक दिलाने और मीटर में छेड़छाड़ को लेकर विभाग के कई कर्मचारियों के खिलाफ भी जांच चल रही है। जैसे ही टीम को ग्राहक मिल जाते तो यह लोग उनके घर और फैक्ट्री तक के मीटर निकालकर लैब में ले आते। यहां मीटर में छेड़छाड़ से पहले सिरिंज से उसमें एसिड डाला जाता। इससे उसकी बॉडी आसानी से खुल जाती और किसी को पता भी नहीं लगता। आइए समझते ही कि मीटर खुलने के बाद उसमें कैसे बिजली की चोरी होती थी- 

रिमोट से चालू और बंद हो जाता था मीटर 
पहले मीटर के टर्मिनल प्लेट को सफाई से खोला जाता। इसके बाद उसमें चिप को फिट करके वापस उसे पैक कर दिया जाता। चिप के जरिए मीटर में करंट के फ्लो को कंट्रोल किया जा सकता था। लैब में चिप लगने के बाद रिमोट के जरिए मीटर को जब चाहे तब बंद और चालू कर सकते थे। 

कम कर दी जाती थी मीटर की स्पीड 
कई मामलों में करंट बाईपास को लेकर भी जानकारी सामने आई है। गैंग मीटर के अंदर करंट को बाईपास कर देता था। इसके लिए टर्मिनल प्लेट खोलकर मीटर में जाने वाले इनकमिंट करंट, न्यूट्रल और आउटगोइंड करंट, न्यूट्रल वायरल के बीच महीन तार लगाया जाता था। इसके जरिए करंट बाइपास होने लगता। बाहर से देखने पर कुछ भी समझ में नहीं आता था। 

मीटर से गायब कर दी जाती थी रीडिंग 
मीटर को खोलकर खास मशीन के जरिए प्रोसेसर की फ्रीक्वेंस को इतना बढ़ा दिया जाता कि वह काम करना ही बंद कर देता। इसके बाद मेमोरी की स्टोर रीडिंग हमेशा के लिए ही गायब हो जाती। इसके बाद मीटर में उसी कंपनी की कम रीडिंग वाली चिप को फिट कर दिया जाता। यह पूरा काम बहुत ही सफाई से किया जाता। 

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