सीएम पोर्टल पर शिकायत का डर दिखा कर अवैध बिल्डिंग बनवाने वालों से करोड़ों की वसूली का खेल-खेल रहा था। शिकायत करने के लिए वह अपने भतीजे के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रहा था। शुरुआती जांच में सात इंजीनियरों के नाम सामने आए हैं।  

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एलडीए का एक अवर अभियन्ता (जेई) अवैध इमारतों को जांच का डर दिखाकर उनसे करोड़ों की वसूली कर रहा था। घटना की जानकारी होने पर प्राधिकरण अफसरों में हड़कंप मच गया। दरअसल, जेई सीएम के यहां शिकायत का डर दिखाकर अवैध बिल्डिंग बनवाने वालों से वसूली करा रहा था। जिस कारण वह खुद ही सीएम के IGRS पोर्टल पर अवैध बिल्डिंगों की शिकायत करवा रहा था। जांच में पता चला कि दर्ज करवाई गई शिकायतों में एलडीए के ही कम्प्यूटर का इस्तेमाल हुआ था। 

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जेई कर रहा था अवैध इमारतों की वसूली
इस तरह की 300 शिकायतों का खुलासा होने के बाद प्राधिकरण अफसरों में हड़कंप मच गया। आरोपित जेई ने सीएम के IGRS पोर्टल पर सभी शिकायतें एलडीए के ही कंप्यूटर से की थी। जिसमें वह अपने भतीजे के नाम और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर शिकायत दर्ज करवा रहा था। मामले की विस्तृत जांच के लिए वीसी ने अपर सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बना दी है। हाल ही में एलडीए वीसी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी को एक अपर अभियंता की शिकायत मिली। अपर अभियंता इंजीनियर प्राधिकरण के प्रवर्तन विभाग में नौकरी कर रहा है। 

शिकायत पर बढ़ जाती वसूली की रकम
शहर में अवैध इमारतों से वसूली का खेल चल रहा था। जेई ने देखा कि जिन इमारतों की शिकायत हो जाती है, वहां पर वसूली और अधिक बढ़ा दी जाती है। यह देख कर जेई ने भी मनमानी वसूली करने का प्लान तैयार किया और खुद ही अवैध इमारतों की शिकायत पोर्टल पर दर्ज करवाने लगा। पोर्टल पर की गई शिकायत में वह अपने भतीजे का मोबाइल नंबर इस्तेमाल कर रहा था। अवर अभियन्ता ने एक नाम और मोबाइल नंबर से कई अवैध इमारतों की शिकायतें दर्ज करवाईं।

संबंधित आरोपी पर होगी कठोर कार्रवाई
एलडीए उपाध्यक्ष डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी के अनुसार, हाल ही में उन्हें अवर अभियन्ता की शिकायत मिली थी। यह शिकायतें वसूली के लिए दर्ज कराई गई थी। शुरुआती जांच में पता चला कि शिकायत दर्ज कराने के लिए एलडीए के ही कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा था। मामले की पूरी जांच होने के बाद संबंधित आरोपी पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। अवैध इमारतों की वसूली में सात इंजीनियरों का नाम सामने आया है। यह सभी इंजीनियर प्रवर्तन विभाग में तैनात हैं। इन इंजीनियरों के खिलाफ शिकायतें भी मिलती रही हैं। 

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