यूपी के गोंडा में डॉग ओली ने अंतिम सांस ली और उसे राजकीय सम्मान के साथ में विदाई दी गई। वह तकरीबन 10 साल से पुलिस विभाग को सेवाएं दे रहा था। उसके निधन के बाद से विभाग में शोक की लहर है। 

गोंडा: यूपी पुलिस में 10 साल और 2 माह तक अपनी सेवाएं देने के बाद डॉग 'ओली' ने अंतिम सांस ली। शनिवार को ओली ने अंतिम सांस ली और इसके बाद से पुलिस विभाग में शोक की लहर है। इस बीच एसपी सिटी, एसपी ट्रैफिक और एएसपी ने राजकीय सम्मान के साथ ओली को अंतिम विदाई दी। ओली का जन्म 10 मार्च 2011 में हुआ था और वह 1 साल की उम्र में साल 2012 में डॉग स्क्वायड में तैनात हुई। तैनाती के 6 माह प्रशिक्षण के तुरंत बाद ओली ने बड़े-बड़े कारनामे करने शुरू कर दिए थे। 'ओली' का सराहनीय योगदान अपराधियों को पकड़वाने और महत्वपूर्ण घटनाओं का खुलासा करने में रहा है। हालांकि अब ओली सभी की आंखे नम करके चली गई है। 

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ओली ने दी 10 साल की लंबी सेवा
आपको बता दें कि गोंडा पुलिस के डॉग स्क्वायड में तैनात ओली का 10 साल की लंबी सेवा के बाद निधन हो गया। उसे राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई। एक्सप्लोसिव श्वान 'ओली' को नायक हैण्डलर तुलसी सोनकर के देख-रेख में राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र टेकनपुर जनपद ग्वालियर मध्य प्रदेश में हुआ था। वहां से 6 माह के प्रशिक्षण के बाद ही ओली को गोंडा में 17 जून 2012 को पुलिस लाइन आना हुआ था। आज 10 वर्ष 2 माह दोपहर 2 कर्तव्य पालन के दौरान श्वान ओली की मौत हो गई।

कई अहम केस में रहा ओली का योगदान
पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने कहा कि यूं तो ओली ने सैकड़ों मामलों का खुलासा कराया लेकिन उसने 2014 में तोपखाना में छुपाए गए बम का भी पता लगाया। इसके बाद 2015 में सिलेंडर फटने की अफवाह पर ईंट पत्थर में दबे बारूद का पता लगाया था। 2016 में भी जनपद बहराइच में रेलवे स्टेशन के पास कचड़े के ढेर से उसने बम का पता लगाया और साल 2018 में झाड़ी से हथगोला खोजा। 2021 में भी वजीरगंज के मकान में दबे बारूद का लगाया। तोमर ने कहा कि ओली को राजकीय सम्मान के साथ में विदाई दी गई है। 

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