यूपी के गोरखपुर में गर्भवती की मौत मामले में चौंकाने वाला सच सामने आया है। अस्पताल की ओर से जारी प्रमाण पत्र में बताया गया कि गर्भवती की मौत भर्ती होने के 4 मिनट बाद ही हो गई। जबकि परिजनों ने बताया कि उन्हें 5 घंटे तक दौड़ाया गया। 

गोरखपुर: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 22 जुलाई को हुई सिद्धार्थनगर की गर्भवती की मौत मामले में नया खुलासा हुआ है। मेडिकल कॉलेज की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र में गर्भवती को 11 बजे भर्ती दिखाया गया। इसके बाद मृत्यु का समय 11 बजकर 4 मिनट लिखा गया है। यानी की गर्भवती की मौत अस्पताल आने के महज 4 मिनट बाद ही हो गई। जबकि परिजनों ने बताया कि तकरीबन 5 घंटे तक उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग में दौड़ाया जाता रहा।

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अलग-अलग वार्ड और काउंटर पर दौड़ाते रहे कर्मचारी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और कर्मचारियों की संवेदनहीनता के चलते 22 जुलाई को सिद्धार्थनगर के बेलहरा के संदीप त्रिपाठी की गर्भवती पत्नी की जान चली गई थी। चंद्रा त्रिपाठी की मौत के बाद सामने आया था कि अस्पताल पहुंचने के 5 घंटे बाद तक भी उन्हें उपचार नहीं मिला। अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी उन्हें ट्रामा सेंटर, सुपर स्पेशियलिटी से लेकर तमाम विभागों और पर्चा काउंटर तक दौड़ाते रहे। आखिरकार उनकी मौत हो गई। उनके गर्भ में पल रहे दो बच्चों की मौत भी हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि डॉक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ही यह 3 मौतें हुईं। 

भर्ती होने के 4 मिनट बाद का लिखा गया मौत का समय
इस मामले में महिला के मृत्यु प्रमाण पत्र से चौंकाने वाला सच सामने आया है। मृत्यु प्रमाण पत्र में सुबह 11 बजे मरीज के भर्ती होने का समय दिखाया गया है जबकि मृत्यु का समय 11 बजकर 4 मिनट अंकित है। वहीं इस मामले में प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने मीडिया को बताया कि जब रोगी को भर्ती किया जाता है और जिस समय उसकी मौत होती वह दोनों ही समय प्रमाण पत्र पर अंकित किए जाते हैं। फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है। जो भी जांच में दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। 

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