निर्भया के गुनहगारों को  देने का रास्ता साफ़ हो गया है। इसके लिए तिहाड़ जेल से दो जल्लादों की डिमांड यूपी जल प्रशासन से की गई थी। मेरठ जेल के जल्लाद पवन को निर्भया काण्ड के गुनहगारों को फांसी देने के लिए भेजा जाएगा

मेरठ(Uttar Pradesh ). निर्भया के गुनहगारों को देने का रास्ता साफ़ हो गया है। इसके लिए तिहाड़ जेल से दो जल्लादों की डिमांड यूपी जल प्रशासन से की गई थी। मेरठ जेल के जल्लाद पवन को निर्भया काण्ड के गुनहगारों को फांसी देने के लिए भेजा जाएगा। इस सदंर्भ में सहमति पत्र पर पवन के सिग्नेचर भी कराकर तिहाड़ जेल प्रशासन को भेज दिया गया है। 

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दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद निर्भया काण्ड के गुनहगारों को फांसी देने वाले जल्लाद पवन का यह पुश्तैनी काम है। उसके परदादा अंग्रेजों की हुकूमत में जल्लाद थे। उसके बाद उनकी विरासत पवन के दादा फिर पिता ने संभाली। अब वह विरासत पवन संभाल रहा है। पवन का परिवार अब तक तकरीबन 25 लोगों को फांसी पर लटका चुका है। 

पवन के परदादा लक्ष्मणराम थे परिवार के पहले जल्लाद 
पवन के बेटे अमन के मुताबिक उसके परिवार के पहले जल्लाद उसके पिता के परदादा लक्ष्मणराम थे। वह अंग्रेजी हुकूमत में जल्लाद थे। उन्ही के समय से पीढ़ी दर पीढ़ी उसके परिवार में ये काम चल रहा है। बताया जाता है कि पवन के परदादा लक्ष्मणराम ने अंग्रेजी शासनकाल में लाहौर में कई क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाया था। 

अब तक इन चर्चित मामलों में दे चुके हैं फांसी 
पवन जल्लाद अपने दादा कालू राम के साथ पांच बार फांसी देने गया है। उसके दादा कालूराम ने ही उसे ये हुनर सिखाया था। पवन के दादा कालू राम ने दिल्ली की जीसस मेरी कालेज की स्टूडेंट गीता चोपड़ा व उसके भाई संजय चोपड़ा के हत्यारे कुख्यात अपराधी रंगा और बिल्ला को 31 जनवरी 1982 को फांसी दी थी। कालू राम ने इंदिरा गांधी के हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह को भी फांसी दी थी। कालूराम ने बाद में ये काम अपने बेटे मम्मू सिंह को सौंप दिया था। मम्मू ने अंतिम बार जबलपुर के कांता प्रसाद तिवारी को साल 1997 में फांसी दी थी। हर फांसी के समय पवन अपने दादा व पिता के साथ रहता था। 

पहली बार भी रेप के आरोपी को फांसी देते वक्त दादा के साथ था पवन 
पवन पहली बार अपने दादा के साथ आगरा जेल में रेप के आरोपी को फांसी देने गया था। पवन रेप के आरोपी जुम्मन को फांसी देने आगरा जेल गया था। इसके बाद वह अपने दादा के साथ पांच फांसियों में साथ रहा था। इन सभी फांसियों में वह दादा के साथ सीखने के लिए गया था।