कांटों वाले बाबा का कहना है कि वह माघ मेले और कुंभ के दौरान में प्रयागराज जरूर आते हैं। इस दौरान चढ़ावे में उन्हें जो भी धन प्राप्त होता है, उसको वह मथुरा में गायों की देख-रेख में इस्तेमाल कर लेते हैं

प्रयागराज ( Uttar Pradesh)। माघ मेले में संगम के किनारे कांटे पर सोते हुए बाबा लोगों के आकर्षक का केंद्र बने हैं। लोग उन्हें कांटे वाले बाबा के नाम से पुकारने लगे हैं। बाबा बताते हैं कि जब वह 18 साल के थे तब उन्होंने गलती से गौ हत्या कर दी थी, जिसके बाद से वह प्रायश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं। 

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हर साल आते हैं संगम
कांटों वाले बाबा का कहना है कि वह माघ मेला और कुंभ के दौरान में प्रयागराज जरूर आते हैं। इस दौरान चढ़ावे में उन्हें जो भी धन प्राप्त होता है, उसको वह मथुरा में गायों की देख-रेख में इस्तेमाल कर लेते हैं

यह है असली नाम
कांटों वाले बाबा का असली नाम लक्ष्मण राम है। बाबा लक्ष्मण राम का कहना है कि कांटों के बिस्तर में सोने से उन्हें दर्द होता है, लेकिन उसे वह सह लेते हैं। 

हर बड़े धार्मिक आयोजन में होते हैं शामिल
बाबा कांटों के बिस्तर पर ही हमेशा लेटे रहते हैं, जिसे देखकर हर कोई सहम जाता है। आपको बता दें कि कांटों वाले बाबा का कहना है कि देश में जहां भी बड़ा धार्मिक आयोजन होता है, वह वहां जरूर जाते हैं।