इसके तहत प्रदेश की 61 सहायक नदियों का कायाकल्प इस वित्तीय वर्ष से शुरू हो जाएगा। इस काम में मनरेगा का 65 फीसदी बजट इस्तेमाल किया जाएगा। इन नदियों का जाल 8994 किलोमीटर तक फैला है। 

लखनऊ: देश भर में मां गंगा नंदी आस्था का विषय है। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में भी यह देखने को मिला था कि मां गंगा नदी की सफाई को लेकर विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला था। बीजेपी अब गंगा नदी का कायाकल्प करने की योजना बना रही है।

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यूपी समेत सभी राज्यों का तैयार किया जाएगा रिवर मैप 
शुरुआती दौर में गंगा की सहायक नदियों को सुधारा जाएगा। ऐसा मानना है कि जब सहायक नदियां साफ होंगी, तभी गंगा को पूरी तरह से स्वच्छ करना संभव है। उत्तराखंड की तरह यूपी समेत सभी राज्यों का रिवर मैप भी तैयार किया जाएगा। 

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत सेंटर फॉर गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट एंड स्टडीज ने छठवीं इंडिया वॉटर इंपैक्ट समिट में मिशन अर्थ गंगा की शुरुआत की थी। इस मिशन के तहत सभी राज्यों की नदियों का मैप बनाया जाएगा। इसके बाद सहायक नदियों की सफाई की जाएगी। इन नदियों के मैप बनाने में तकनीकी संस्थानों की भी मदद ली जाएगी।

क्लीन गंगा के संस्थापक प्रो. विनोद तारे ने बताया कि नदियों की सफाई की शुरुआत नए वित्तीय वर्ष में प्रदेश से होगी। 61 नदियों के नाम, इनके ब्लॉक, लंबाई की जानकारी जुटाई जा चुकी है। अतिक्रमण कहां, कहां है, इसकी रिपोर्ट बननी बाकी है। इस रिपोर्ट के तैयार होते ही काम शुरू हो जाएगा। 

रिवर मैप बनाने के लिए यूपी और आसपास के कई संस्थानों को शामिल किया गया है। इनमें आईआईटी कानपुर, बीबीएयू लखनऊ, बीएचयू, एनआईएच रुड़की हैं। इनके नाम नदियों का बंटवारा कर दिया गया है। संस्थानों को नदी की लंबाई, चौड़ाई, ब्लॉक, फैलाव, अतिक्रमण की जानकारी देनी है। 

ये संस्थान करेंगे सफाई
आईआईटी कानपुर के हिस्से 17 नदियां : महावा, सोत, अरिल, कटना, देओहा, हिंडन, धोरा, बहागुल, सैजिनी, गनगन, धेला, गोवर्धन, काली ईस्ट, काली, निम, नून, ककवन।

बीबीएयू लखनऊ को 15 नदियां
 बेहता, कुकरैल, कुवाना, सरयान, बुद्धि राप्ती, कल्याणी, रेथ, भंभारा, राप्ती, सरजू, रोहिनी, सई, कठिना, भैसिनी, टेढ़ी। 
बीएचयू को 24 नदियां : मंदाकिनी, सेंगर, गरहरा, चंदरवाल, रिंद, बिरमा, गंच, अर्जुन, सिहू, श्याम, कोंचमलंगा, नोन, लखेरी, पतराही, केओलारी, छेंच, ससौर, मगारिया, ओहन, गंटा, अनुझर, गेडुआ, वरुणा, अस्सी।

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