यूपी चुनाव के बीच पीएम मोदी ने काशी में पूजा अर्चना के बाद विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि मेरी मृत्यु की कामना की गई। लोग इतना गिर चुके हैं कि ऐसे बयान दे रहे हैं। हालांकि उन्हें इस कामना पर भी आनंद आया। आपको बता दें कि भारत में बहुत से लोग ऐसे हैं जो काशी में मृत्यु की कामना करते हैं। इसके पीछे का कारण मोक्ष की प्राप्ति है। 

गौरव शुक्ला

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वाराणसी: पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर पूजा-अर्चना की और विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विश्वनाथ धाम (Kashi Vishwanath Dham) के लोकार्पण के समय हमारी मृत्यु की कामना भी की गई थी। पीएम ने यहां विपक्ष पर बिना नाम लिए निशाना साधा और कहा कि लोग इतना नीचे गिर गए हैं कि उन्हें वह ऐसा बयान दे रहे हैं। हालांकि मृत्यु की कामना पर भी मुझे आनंद आया। मेरी(पीएम मोदी) मृत्यु तक न काशी मुझे छोड़ेगी न काशी के लोग। अगर भत्तों की सेवा करते चला जाऊं तो उससे बढ़िया क्या होगा। 

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पीएम मोदी के इस बयान के बाद सभा में मौजूद लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया। हालांकि एक सवाल जो कई के मन में आया वह यह है कि आखिर लोग काशी में मृत्यु की कामना क्यों करते हैं। हालांकि पीएम मोदी ने भी अपने बयान में इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा कि परिवारवादी लोग इसे समझ नहीं सकते कि यहां से मुक्ति का मार्ग खुलता है। 

मोक्ष प्राप्ति की कामना में काशी आना चाहते हैं लोग 
मृत्यु और काशी का अपने आप में अनोखा रिश्ता है। दुनिया में कहीं भी रहते हों लेकिन वह जीवन के अंतिम समय में काशी आकर प्राण त्यागना चाहते हैं। मान्यता है कि काशी में प्राण त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। लिहाजा मोक्ष प्राप्ति की चाह में लोग भोलेनाथ की नगरी काशी में आना चाहते हैं। 

सदियों से काशी का मणिकर्णिका घाट लोगों के शव दाह का गवाह बनता आया है। गंगा के तट पर बसा बनारस एकमात्र ऐसा समय है जहां मृत्यु के बाद भी उत्सव मनाया जाता है। यहां मृत्यु के बाद खुशी मनाए जाने के पीछे का कारण यह खुशी है कि व्यक्ति सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर चल पड़ा। यहीं कारण है कि कई जातियों में भी मृत्यु के बाद उत्सव सा माहौल देखा जाता है। गाजे बाजे के साथ अंतिम यात्रा निकाली जाती है और उत्सव के जैसे ही कई दिनों तक कार्यक्रम चलते रहते हैं। 

जन्म मरण के चक्र से मिलती है मुक्ति 

लोगों में मान्यता है कि काशी में मरने वाले व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से छूट मिल जाती है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग जीवन का अंतिम समय बिताने काशी में आते हैं। यहां इसको लेकर कई मोक्ष केंद्र भी बने हुए हैं। काशी के मोक्ष केंद्र में रोजाना दर्जनों लोग आवेदन करते हैं। 

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