कांग्रेस के स्थापना दिवस पर पार्टी पूरे देश में नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ मार्च कर रही है। मुंबई से लेकर जयपुर तक कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर नजर आए। संविधान बचाओ, देश बचाओ कार्यक्रम के तहत कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी दिल्ली, राहुल गांधी गुवाहाटी और प्रियंका गांधी लखनऊ में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं।

लखनऊ (Uttar Pradesh). कांग्रेस के स्थापना दिवस पर पार्टी पूरे देश में नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ मार्च कर रही है। मुंबई से लेकर जयपुर तक कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर नजर आए। संविधान बचाओ, देश बचाओ कार्यक्रम के तहत कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी दिल्ली, राहुल गांधी गुवाहाटी और प्रियंका गांधी लखनऊ में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सीएए और एनआरसी पर संदेश भी दिया।

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हमें अकेले ही लड़ना होगा
अपने संबोधन में प्रियंका ने कहा- हर शहर में देश के कौने-कौन में छात्र-युवा नागरिकता कानून के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार दमन और भय से आवाजें दबा रही है। जब-जब लोगों की आवाज दबाई जाती है, तब-तब कांग्रेस अन्याय के खिलाफ खड़ी होती है। यूपी में दूसरी विपक्षी पार्टियां कुछ नहीं कर रही हैं, वो डर रहे हैं। हमको अकेले लड़ना है, हम किसी से नहीं डरेंगे। यूपी को हम मजबूत बनाएंगे। देश के लिए मिसाल होना चाहिए कि यूपी को बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी खड़ी रही।

फैलाया जा रहा देशभक्ति का भ्रम
प्रियंका ने कहा, देश खतरे में है। हमने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुई हिंसा को देखा। डर का माहौला फैलाया जा रहा है। युवकों को पीटा जा रहा। देश में वही शक्तियां सरकार चला रही है, जिनसे हमारी ऐतिहासिक टक्कर रही है। उनकी दमनकारी विचारधारा है, फूट की विचारधारा है। यह वही विचारधारा है जिसने आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं दिया, वह देशभक्ति के नाम पर देश में भय फैला रहे हैं। हमारी लड़ाई शुरू से इसी विचारधारा के खिलाफ है।

बिजनौर में युवक की मौत पर प्रियंका ने कही ये बात
नागरिकता कानून को लेकर हो रहे विरोध के दौरान बिजनौर में हुई युवक की मौत पर बोलते हुए प्रियंका ने कहा, बिजनौर में एक 21 साल का लड़का दूध लेने जा रहा था। पिता ने रोका, तो उसने कहा मैं 5 मिनट में आता हूं। वहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने धमकाया कि अगर एफआईआर कराओगे तो तुम्हारे खिलाफ केस कराएंगे। उसे उसके गांव में दफनाने नहीं दिया। वहां से 40 किलोमीटर दूर दफनाया गया। ऐसे कई लड़कों को मारा गया और जिसे मारा नहीं उसे जेल में डाल दिया। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वो विरोध कर रहे थे।