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यूपी के 300 गांवों में पुरूषों को देखते ही पिटती हैं महिलाएं, मार खाने के बाद खिलानी पड़ती है मिठाई


महिलाएं लाठी हाथ या पैर पर ही मारती हैं। वहीं, गांवों में पुरुष छिपते फिरते रहते हैं, यह सिलसिला तीन दिन तक चलता रहता है। यदि कोई पुरूष मार खाया तो इसके बाद उसे उस महिला के घर मिठाई भेजकर यह विश्वास दिलाता है कि उसे कहीं कोई चोट नहीं लगी है।

Unique Holi takes place in 300 villages of UP, women beat men as soon as they are seen asa
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Jalaun, First Published Mar 10, 2020, 2:45 PM IST
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जालौन (Uttar Pradesh) । आज हर ओर होली है की गूंज सुनाई दे रही है। लोग होली की ही बातें कर रहे हैं। ऐसे में हम आपको आज एक ऐसी परंपरा के बारे में बता रहें हैं, जिसे शायद कम ही लोग जानते हैं। जी हां बरसाने की लठमार होली की तर्ज पर यूपी के 300 और गांवों में भी अनूठी लठमार होली खेली जाती हैं। ये गांव बुंदेलखंड के जालौन, हमीरपुर और महोबा जिले में हैं। जहां होली के तीन दिन बाद तक पुरूष छिपते फिरते हैं, क्योंकि महिलाओं की टोली पुरूषों पर लाठी से वार कर देती हैं। मार खाने के बाद पुरूष को संबंधित महिला के घर मिठाई भेजकर यह विश्वास दिलाता है कि उसे कहीं कोई चोट नहीं लगी है।

इस तरह निभाई जाती है परंपरा
इस परंपरा में दूज पूजन के बाद महिलाओं का जत्था लाठी लेकर निकलता है। गांव के पुरुष उनसे बचने के लिए भागते हैं। होली को रोंचक बनाए रखने के लिए कुछ पुरुष छिप-छिपकर महिलाओं पर रंग डालते हैं। महिलाएं उसे ललकार कर खदेड़ती हैं। 

पिटाई के बाद खिलाते है मिठाई
महिलाएं लाठी हाथ या पैर पर ही मारती हैं। वहीं, गांवों में पुरुष छिपते फिरते रहते हैं, यह सिलसिला तीन दिन तक चलता रहता है। यदि कोई पुरूष मार खाया तो इसके बाद उसे उस महिला के घर मिठाई भेजकर यह विश्वास दिलाता है कि उसे कहीं कोई चोट नहीं लगी है।

नहीं पता कब से शुरू है ये परंपरा
महिलाएं जिस तरह लाठी भांजती है, वह युद्धक तरीके जैसा है। इस कारण, इसे स्त्रियों के युद्ध पारंगत होने की रानी लक्ष्मीबाई की मुहिम से भी जोड़ते हैं। हालांकि ये परंपरा शुरू होने की जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन बुंदेलखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार इसे आत्मरक्षा के गुर सीखने से जोड़ा जाता है। तब लाठी ही बचाव का प्रमुख हथियार थी। 

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