उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अंतिम चरण के चुनाव के लिए बहुत सारे उम्मीदवारों ने नामांकन किया जिसमें कई उम्मीदवार के पक्ष में पास हुए तो कई उम्मीदवारों को मायूसी हाथ लगी। लेकिन बनारस में एक ऐसा भी नामांकन खारिज हुआ जिसके बाद नामांकन स्थल के बाहर जमकर ड्रामा हुआ। 

अनुज तिवारी

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वाराणसी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Vidhansabha Election)में अंतिम चरण के चुनाव के लिए बहुत सारे उम्मीदवारों ने नामांकन किया जिसमें कई उम्मीदवार के पक्ष में पास हुए तो कई उम्मीदवारों को मायूसी हाथ लगी। लेकिन बनारस में एक ऐसा भी नामांकन खारिज हुआ जिसके बाद नामांकन स्थल के बाहर जमकर ड्रामा हुआ। 

2012 से भर रहा है पर्चा दाखिल
यह ड्रामा तब देखने को मिला जब 2012 से चुनाव लड़ रहे संतोष मूरत सिंह का पर्चा खारिज हो गया। संतोष मूरत सिंह वही है जो अपने गले में तख्ती डालकर लोगों को मैं जिंदा हूं की बात करते हैं, लोगों के बीच में दिखाई देते हैं। संतोष मुहूर्त का पर्चा खारिज होने के बाद वह एडीएम सिटी के पैर पर गिर गिरा कर न्याय की गुहार मांगने लगे और पुलिस की कार के आगे धरने पर बैठ गए। बवाल बढ़ता देख पुलिस ने संतोष मूरत सिंह को शांति भंग के मामले में हिरासत में ले लिया।

भाजपा को मेरे सत्ता में आने से है डर 
मीडिया से बातचीत में संतोष ने चुनाव प्रक्रिया पर काफी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि साजिश के तहत उनका पर्चा खारिज किया जा रहा है। उन्होंने कहां इसके पीछे कोई और नहीं बल्कि खुद सीएम योगी और जिस वाराणसी के शिवपुर विधानसभा से उसने पर्चा दाखिल किया था। वहां के भाजपा विधायक पर भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा सत्ता में बैठे लोगों को डर था कि संतोष अपनी लोकप्रियता के कारण जीत न जाए। इसलिए ऐसा कदम उठाया गया है। संतोष का नामांकन रद्द होने के पीछे वजह शपथ पत्र की त्रुटि बताई गई। 

जानिए कौन हैं संतोष
संतोष वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के छितौनी गांव का रहने वाला है और वर्ष 2012 से राष्ट्रपति के चुनाव में पर्चा भरने से लेकर आगे होने वाले सभी विधानसभा लोकसभा यहां तक कि पंचायत चुनाव में भी पर्चा भर चुका है और अभी विधानसभा चुनाव के लिए कानपुर से भी पर्चा भरा था। वहां भी संतोष का पर्चा खारिज हो गया था।

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