डॉमिनोज पिज्जा कंपनी की एक गलती पर लाखों रुपए का जुर्माना कट गया। उपभोक्ता आयोग ने इसे घोर लापरवाही करार करते हुए कंपनी को एक महीने का समय देकर उपभोक्ता के रुपए का भुगतान करने के लिए निर्देश दिए है। 

रुड़की: कंपनियों की तरफ से अक्सर ऐसी गलतियां देखने को मिलती रहती है। उपभोक्ता ऑर्डर कुछ करता लेकिन उसको मिलता कुछ और ही है। ऐसा ही मामला उत्तराखंड के रुड़की में सामने आया है। जिसमें शाकाहारी पिज्जा के ऑर्डर पर मांसाहारी पिज्जा डिलीवर हुआ। कंपनी की तरफ से लापरवाही के चलते भारी जुर्माना लगा। इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने भी इसे कंपनी की लापरवाही को बताते हुए करीब नौ लाख का जुर्माना लगाया है। शाकाहारी पिज्जा के ऑर्डर पर मांसाहारी पिज्जा डिलीवर करने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे कंपनी की घोर लापरवाही और उपभोक्ता सेवा में कमी मानते हुए 9,65,918 रुपये का जुर्माना लगाया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित उपभोक्ता ने बताया था कि वह और उनका परिवार पूर्णतः शाकाहारी है। ऐसे में मांसाहारी पिज्जा पहुंचने के बाद उन्हें उल्टियां हुई और तबीयत बिगड़ गई।

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उपभोक्ता सेवा में हुई घोर लापारवाही 
इस मामले पर उपभोक्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने बताया कि रुड़की साकेत निवासी शिवांग मित्तल ने 26 अक्टूबर 2020 को शाम साढ़े आठ बजे डॉमिनोज पिज्जा कंपनी को ऑनलाइन पिज्जा टाको व चॉको लावा केक के लिए आर्डर किया था। जिसके बाद डॉमिनोज पिज्जा का एक कर्मचारी एक पैकेट में पिज्जा घर पर लाया और शाकाहारी पिज्जा की कीमत 918 रुपए थी। उपभोक्ता शिवांग ने पैकेट खोला तो पता चला कि वह मांसाहारी पिज्जा था। जिसके बाद उनको उल्टियां आने लगी और तबीयत खराब हो गई। उपभोक्ता व उनका पूरा परिवार पूर्णत शाकाहारी है इसलिए उनके मन और स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ा। पीड़ित उपभोक्ता ने पिज्जा कंपनी के खिलाफ थाना गंगनहर, रुड़की में भी शिकायत की थी लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उपभोक्ता ने आयोग का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की बात को सुनते हुए फैसला सुनाया। 

कंपनी को आयोग ने दिया एक महीने का समय
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष कंवर सैन, सदस्य अंजना चड्ढा व विपिन कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि पिज्जा कंपनी द्वारा शाकाहारी पिज्जा आर्डर करने पर भी मांसाहारी पिज्जा भेज दिया गया, जो उपभोक्ता सेवा में घोर लापरवाही है। पिज्जा कंपनी को आदेश दिया है कि एक महीने के अंदर उपभोक्ता को पिज्जा की कीमत 918 रुपए मय छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ मानसिक, शारीरिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में भुगतान करे। यानी साढ़े चार लाख रुपए व विशेष हर्जे के रूप में अंकन पांच लाख रुपए यानि कुल 9,65,918 रुपये का भुगतान करे।

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