मलेशिया: ऐसा कई बार होता है कि हम अपने से बेहतर हालत में जी रहे लोगों को देख उनसे जलते हैं। उनकी लाइफस्टाइल से हम प्रभावित होते हैं लेकिन चूंकि हम उसे मैच नहीं कर पाते तो हताश हो जाते हैं। ऐसे में ये सोचना चाहिए कि जिनकी लाइफ में बेसिक सुविधाएं भी नहीं हैं, वो अपनी जिंदगी कैसे जीते होंगे? मलेशिया की रहने वाली रोसेलिना अब्दुल्ला इसी का उदाहरण हैं। छोटी उम्र में रोसेलिना के सिर से माता-पिता का साया हट गया। जिसके बाद अपने 6 छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी भी रोसेलिना के ऊपर आ गई। 

पिता के बाद उठा मां का साया 
16 वर्षीय रोसेलिना अब्दुल्ला ने रविवार को कैंसर से पीड़ित अपनी मां को खो दिया। उसके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। मां के जाने के बाद 6 मासूमों की जिंदगी अब रोसेलिना के ऊपर टिक गई है। उसके सभी  भाई बहनों की उम्र 4 से 13 वर्ष के बीच है। हरियन मेट्रो के अनुसार, 16 वर्षीय रोसेलिना खुद भी दिल की मरीज है। 

मां के लिए छोड़ा था स्कूल 
कैंसर के कारण जब रोसेलिना की मां की स्थिति बिगड़ रही थी और वह अस्पताल में भर्ती थी, तब उसे मां की देखभाल के लिए स्कूल छोड़ना पड़ा था। इस दौरान वो अपने भाई-बहनों की देखभाल करती थी। लेकिन अब मां के गुजर जाने के बाद सब कुछ उसके ही कंधों पर आ गया है। जिसमें घर संभालने की जिम्मेदारी भी है। 

बचपन में उठ गया था पिता का साया 
रोसेलिना जब सिर्फ तीन साल की थी तो उसके पिता का निधन हो गया था। तब उसकी मां ने दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली। इसके बाद दूसरे पति से उसके 6 बच्चे हुए। लेकिन धीरे-धीरे दोनों में झगड़े बढ़ गए और बात तलाक तक पहुंच गई। अब बीवी की मौत के बाद रोसेलिना के दूसरे पिता गायब हैं। रोसेलिना अकेले ही अपने भाई-बहनों का ध्यान रख रही है। 

खुद भी है गंभीर बीमारी क शिकार 
जिंदगी की लड़ाई लड़ रही रोसेलिना पहले अपनी मां के साथ काम पर जाया करती थी। लेकिन मां की मौत के बाद वहां के मालिक ने पैसे देने बंद कर दिए। रोसेलिना खुद भी दिल की बीमारी से ग्रस्त है। उसके पास खुद के इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। साथ ही अपने भाई-बहनों का भी ख्याल रखना पड़ता है। फिलहाल रोसेलिना अपनी दादी के साथ रह रही है। 

मदद को सामने आए लोग 
रोसेलिना के बारे में जानने के बाद कई लोग उसकी मदद के लिए सामने आए हैं। परिवार की आर्थिक सहायता के लिए रोसेलिना ने केलंटन वेलफेयर क्लब के प्रेसिडेंट पूई तीआंग लम से मुलाकात की। जिसके बाद अब टीम उसकी मदद कर रही है। ताकि रोसेलिना अपनी बीमारी और पढ़ाई के साथ जारी जंग जीत पाए।